नीतीश के इस्तीफे के 7 दिन बीते, विधायक दल का नेता क्यों नहीं चुन पा रही JDU? ये रहे 3 अहम कारण

नीतीश कुमार के इस्तीफे के 7 दिन बाद भी जदयू विधायक दल का नेता नहीं चुन पाई है. आज पटना में जदयू विधानमंडल की बैठक हुई, जिसमें पूर्व सीएम नीतीश कुमार भी शामिल थे. लेकिन इस बैठक में भी विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हो सका. बैठक में विधायक दल का नेता चुनने के लिए नीतीश कुमार को अधिकृत कर दिया गया है.

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जदयू विधानमंडल की बैठक में नीतीश कुमार.
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  • बिहार के पूर्व CM नीतीश के इस्तीफे के बाद भी जनता दल यूनाइटेड विधानमंडल दल का नया नेता चयनित नहीं कर पाई है.
  • सर्वमान्य और स्वीकार्य नेता की कमी के कारण जदयू विधानमंडल दल के नेता चयन में देरी हो रही है.
  • निशांत कुमार के नेतृत्व में आने को लेकर पार्टी और निशांत के बीच असहमति के कारण चयन में बाधा आई है.
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पटना:

JDU MLA Leader: बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के एक सप्ताह बाद भी जनता दल यूनाइटेड (JDU) अपने विधानमंडल दल के नेता का चुनाव नहीं कर पाई है. माना जा रहा था कि 14 अप्रैल को BJP विधानमंडल दल में साथ ही JDU की भी बैठक होगी. उसी दिन नीतीश कुमार की जगह नए नेता का चयन होगा. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. पार्टी ने आज यानी 20 अप्रैल को विधानमंडल दल की बैठक बुलाई. आज भी नेता का चयन नहीं हो पाया. नेताओं ने नीतीश कुमार को विधानमंडल दल के नेता के चयन के लिए अधिकृत किया. वे नए नेता का चयन करेंगे. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर JDU अपने नेता का चयन क्यों नहीं कर पा रही? 

JDU विधायक दल का नेता चुनने में हो रही देरी के 3 कारण

कारण 1- सर्वमान्य चेहरे की कमी

जदयू के विधानमंडल दल के नेता के चयन में देरी की सबसे बड़ी वजह सर्वमान्य चेहरे की कमी है. नीतीश कुमार ही अब तक विधानमंडल दल के नेता थे. पार्टी में उनके बाद ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव, अशोक चौधरी जैसे नेता हैं. लेकिन इनमें से किसी की भी नीतीश कुमार जैसी स्वीकार्यता नहीं है. ललन सिंह और संजय झा सांसद हैं, शेष नेताओं में किसी भी एक पर सहमति नहीं है. इसलिए नेता के चयन में देरी हो रही है. 

कारण 2- निशांत को लेकर असमंजस 

JDU विधानमंडल दल के नेता के चयन में देरी का सबसे बड़ा कारण निशांत को लेकर असमंजस है. पार्टी के बड़े नेताओं का मानना है कि निशांत को अब लीडरशिप रोल में आना चाहिए. इसीलिए उन्हें डिप्टी CM बनाने पर भी जोर दिया जा रहा था. हालांकि वे इसके लिए तैयार नहीं हुए. निशांत पहले पूरे बिहार का दौरा करना चाहते हैं. संगठन और सरकार के कामकाज को समझना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने डिप्टी CM बनने से इनकार कर दिया. अब विधानमंडल दल के नेता बनने में भी उनकी रुचि नहीं है. पार्टी नेताओं की इच्छा और निशांत की इच्छा अलग-अलग है. 

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कारण 3- सामाजिक समीकरण बनाए रखने की चुनौती

नीतीश कुमार भले ही कुर्मी जाति से हैं, लेकिन सोशल इंजीनियरिंग के जरिए उन्होंने अपने चेहरे पर सभी वर्ग को साधा. मौजूदा सरकार में उन्होंने अगड़ी जाति से आने वाले विजय चौधरी और पिछड़ी जाति से आने वाले विजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी CM बनाया है. दोनों ही जातियां जदयू का आधार वर्ग नहीं रही हैं. इसलिए विधानमंडल दल के नेता के चयन में पार्टी इस बात का ध्यान रखना चाहती है. 

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