बिहार के नए राज्यपाल जनरल सैयद अता हसनैन कौन हैं? कश्मीर में आतंकियों के लिए थे काल

जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक टॉप अफसर, रणनीतिकार, विद्वान और लेखक के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी के 40 साल भारतीय फौज को दिए हैं. खासकर जम्मू-कश्मीर में उन्होंने काफी साल फोर्स का नेतृत्व किया है.

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नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है. उन्हें वर्तमान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह नियुक्त किया गया है. बिहार में ये नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं और राज्य का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? यह यक्ष प्रश्न बन हुआ है.

कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन?

जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक टॉप अफसर, रणनीतिकार, विद्वान और लेखक के रूप में जाने जाते हैं.  उन्होंने अपनी जिंदगी के 40 साल भारतीय फौज को दिए हैं. खासकर जम्मू-कश्मीर में उन्होंने काफी साल फोर्स का नेतृत्व किया है. उन्होंने वहां जम्मू-कश्मीर में 15वीं  चिनार कोर की कमान संभाली थी. इस दौरान जनरल हसनैन ने  'हार्ट्स डॉक्ट्रिन' को लागू किया था. इस नीति में सुरक्षा अभियान के साथ आम लोगों से संवाद और सहयोग बढ़ाना अहम होता है. इस नीति को घाटी में उग्रवाद कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया था.

शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई, डीयू से ग्रेजुएशन

जनरल हसनैन ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में बी.ए. ऑनर्स (1972) किया. जनरल हसनैन लंदन के 'रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज' और हवाई के 'एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज' से वैश्विक सुरक्षा और रक्षा रणनीतियों का शिक्षा ली थी.

IMA से पासआउट, गढ़वाल राइफल्स में नियुक्ति

इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से ग्रेजुएशन करने के बाद वे गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन में शामिल हुए. चिनार कोर (15 Corps) की कमान: कश्मीर घाटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली, जहां उन्होंने 'जनसंपर्क' और 'रणनीति' का बेहतरीन तालमेल दिखाया. भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फोर्स 21 कोर की कमान का नेतृत्व किया. 2013 में सेवानिवृत्ति से पहले उन्होंने सेना मुख्यालय में सैन्य सचिव के महत्वपूर्ण पद पर कार्य किया.

सम्मान और पदक

अपने 40 साल के करियर में जनरल हसनैन को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए कई अवॉर्ड से नवाजा गया है. 

  • परम विशिष्ट सेवा पदक
  • उत्तम युद्ध सेवा पदक 
  • अति विशिष्ट सेवा पदक 
  • सेना पदक
  • विशिष्ट सेवा पदक 'बार' के साथ
  • ऑपरेशन विजय स्टार, सियाचिन ग्लेशियर मेडल और संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन पदक (रवांडा और मध्य पूर्व).

सेवानिवृत्ति के बाद की भूमिका

2013 में सेना से विदा लेने के बाद भी वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे. 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का चांसलर नियुक्त किया गया. वह राष्ट्रीय सुरक्षा, भू-राजनीति और रक्षा मामलों पर एक प्रमुख स्तंभकार और वक्ता के रूप में अपनी राय रखते रहे हैं.

दो बेटियां-पत्नी, जनरल हसैनन का परिवार

सैयद अता हसनैन की पत्नी सबीहा हसनैन एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर एग्जिक्यूटिव हैं. उनकी दो बेटियां हैं. एक हाई-प्रोफाइल सार्वजनिक जीवन के बावजूद, उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन को निजी और गरिमापूर्ण बनाए रखा है.
 

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