बिहार के युवक का सिर फटने पर स्टेपलर पिन मारने के वायरल वीडियो की सच्चाई

बिहार के एक युवक के सिर पर लगी चोट पर स्टेपलर पिन से स्टिच किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. लेकिन इस वायरल वीडियो की सच्चाई क्या वैसी ही है, जैसा उस वीडियो में बताया जाता है, जानिए पूरी कहानी.

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वायरल वीडियो में युवक के सिर पर लगी चोट पर लगे स्टिच को स्टेपलर पिन बताया जा रहा है.
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  • बिहार के नवादा में एक युवक के सिर की चोट के इलाज में स्टेपलर पिन लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.
  • पूर्व CS डॉ विमल प्रसाद सिंह ने बताया कि सर्जिकल स्टैबलर पिन आधुनिक चिकित्सा में टांके से बेहतर होता है.
  • वारिसलीगंज की चिकित्सा प्रभारी डॉ आरती अर्चना ने वायरल वीडियो पर कहा कि मामले की जांच जारी है.
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नवादा:

शनिवार को बिहार के नवादा जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. वीडियो में दावा किया गया कि एक मरीज के इलाज में ग्रामीण चिकित्सक ने सिर पर लगे चोट पर स्टेपलर पिन से स्टिच कर दिया. डॉक्टर पर अमानवीय व्यवहार और लापरवाही बरतने के आरोप लगाए जा रहे हैं. ग्रामीण चिकित्सक पर एक युवक के सिर फटने पर इलाज में टांका के बजाय ऑफिस में इस्तेमाल होने वाली स्टेपलर पिन लगाने की बात कही जा रही है. हालांकि पूर्व सिविल सर्जन डॉ विमल प्रसाद सिंह ने कहा कि मेडिकल क्षेत्र की जानकारी नहीं रखने वाले ऐसा सवाल उठा रहे हैं. आधुनिक चिकित्सा में सर्जिकल पिन का चलन है, जो सामान्य पिन जैसा दिखता है. जबकि वारिसलीगंज की चिकित्सा प्रभारी डॉ आरती अर्चना ने कहा कि बिना योग्यताधारी ग्रामीण चिकित्सक को ऐसा गंभीर इलाज नहीं करना चाहिए.

वायरल वीडियो से अलग ही वास्तविक स्थिति?

लेकिन वास्तविक स्थिति वायरल वीडियो की स्क्रिप्ट से अलग है. जैसा कि नवादा के पूर्व सिविल सर्जन डॉ विमल प्रसाद सिंह ने बताया. उन्होंने कहा कि जिन्हें मेडिकल क्षेत्र की जानकारी नहीं है वह ऐसे सवाल उठा रहे हैं. डॉ विमल प्रसाद सिंह ने कहा कि शरीर के कटने फटने पर सर्जिकल स्टैबलर पिन का उपयोग होता है. यह आधुनिक तरीका है.  यह टांका से अधिक सुरक्षित और बेहतर होता है. यह टांका से अधिक सहज होता है. दर्द भी कम होता है.

डॉ. विमल प्रसाद सिंह ने बताया कि जख्म सूखने पर इसे बाहर निकालने में भी सुविधा होती है. यह अलग बात है कि इस तरह के स्टेबलर पिन का उपयोग किसी ग्रामीण प्रैक्टिशनर के जरिए यकिया गया है, जो गलत है. लेकिन योग्यताधारी चिकित्सक के जरिए इस तरह के पिन का उपयोग किए जाने की स्थिति में चिकित्सक को गलत ठहराने वालों पर प्राथमिकी हो सकती थी.

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संज्ञान में आया मामला, पड़ताल की जा रही

दूसरी तरफ, वारिसलीगंज की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आरती अर्चना ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में भी आया है. उन्होंने कहा कि अब सर्जिकल पिन का उपयोग किया जाता है. लेकिन इस वीडियो से यह पता नहीं चल पाया है कि यह सर्जिकल पिन है या फिर सामान्य पिन?  फिर भी चिकित्सक को इस तरह के गंभीर रोग का इलाज नहीं करना चाहिए. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आशा के जरिए ग्रामीण चिकित्सक के बारे में जानकारी ली जा रही है. 

3 मार्च को जख्मी हुआ था युवक

पीड़ित युवक के अनुसार, 3 मार्च को नवादा के वारिसलीगंज प्रखंड के नारोमुरार गांव के एक युवक  एक हादसे में घायल हो गया था. दुर्घटना में उसके सिर पर गहरी चोट आई और काफी खून बहने लगा. लिहाजा, वह वारिसलीगंज के गणेश नगर स्थित एक स्थानीय डॉक्टर के पास पहुंचा था, जहां उनका इलाज किया गया. जख्म के इलाज का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें जख्म के इलाज में टांका के बजाय सामान्य स्टेबलर पिन मारे जाने की बात कही जा रही है. इसे लेकर ग्रामीण चिकित्सक पर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए जा रहे हैं.

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