- तेजस्वी यादव RJD के कार्यकारी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं, जबकि लालू यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे.
- प्रदेश स्तर पर युवा कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे, जो संगठन को पुनर्गठित कर विरोध प्रदर्शन करेंगे.
- अल्पसंख्यक समुदाय से किसी युवा नेता को प्रधान महासचिव या प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है.
Big Change In RJD: पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तेजस्वी यादव अब फिर से अपनी पार्टी RJD को दुबारा खड़ा करने की कोशिश में जुट गए हैं. बीते दिनों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की एक बैठक पटना में बुलाई गई थी. उसके पहले हार के कारणों की जांच करने के लिए भी एक समिति बनी. लगातार हो रही इन बैठकों के बाद अब जो खबरें निकल कर आ रही हैं, उससे लगता है कि इसी महीने के अंत तक तेजस्वी RJD में कई बदलाव करने जा रहे हैं. पार्टी की पूरी ओवरहालिंग की जाएगी.
तेजस्वी बन सकते हैं RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
सबसे बड़ी बात यह है कि तेजस्वी यादव RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन सकते हैं. यहां यह बताना जरूरी है कि लालू यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, मगर कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अब सारे फैसले तेजस्वी ही करेंगे. कई जानकार यह भी मानते हैं कि अभी भी सारे फैसले तो तेजस्वी ही कर रहे हैं.
प्रदेश स्तर पर भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की योजना
उसी तरह प्रदेश स्तर पर भी एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाएगा. अभी जो प्रदेश अध्यक्ष हैं- मंगनी लाल मंडल वो बने रह सकते हैं. मगर किसी युवा को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेवारी दी जाएगी, जो संगठन को नए सिरे से बनाएगा. साथ में JDU और BJP सरकार का सड़क पर भी विरोध करेगा.
प्रदेश में किसी युवा अल्पसंख्यक नेता मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
इसके अलावा प्रधान महासचिव पद पर एक और नई नियुक्ति की जा सकती है. कहा जा रहा है कि प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष या प्रधान महासचिव पद पर किसी युवा अल्पसंख्यक नेता की नियुक्ति की जा सकती है. यह भी कहा जा रहा है कि यहां पर किसी सीमांचल से आने वाले नेता को जिम्मेवारी दी जा सकती है.
संगठन में बदलाव के बाद यात्रा पर निकलेंगे तेजस्वी
नए रूप में संगठन में फेरबदल करने के बाद ही तेजस्वी यादव बिहार के दौरे पर निकलेंगे. यह इसलिए भी जरूरी है कि सीमांचल में ओवैसी अपनी पैठ बना चुके हैं और सीमांचल से बाहर भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करेंगे. दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदाय अब RJD के पार्टी संगठन में अपनी भागीदारी बढ़ाने की बात करने लगा है.
RJD के विंग भंगकर सभी जातियों से नेताओं को किया जाएगा शामिल
तेजस्वी यादव आरजेडी के सभी विंग को भंग करके नई नियुक्ति करने वाले हैं और इन नियुक्तियों में सभी जातियों के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, जैसे कुशवाहा, दलित, सर्वण. तेजस्वी को भी मालूम है कि यदि RJD को फिर से बिहार की राजनीति में स्थापित करना है तो उसे यादव-मुस्लिम वोट बैंक से आगे सोचना पड़ेगा और अन्य जातियों को जोड़ना होगा.
यादवों के एग्रेसन पर कंट्रोल और महिला फेस पर काम करना
आरजेडी केवल यादव-मुस्लिम की पार्टी बनकर चुनाव नहीं जीत सकती है. आरजेडी को यादवों की आक्रामकता भी काबू में रखना होगा. साथ ही बाकी पिछड़ी जातियों में विश्वास पैदा करना होगा कि आरजेडी उनकी पार्टी है. वहीं आरजेडी के लिए एक कमजोर कड़ी महिला वोटर भी है, तेजस्वी को इस पर भी काम करना होगा. इसके लिए महिलाओं को भी पार्टी संगठन में जगह देनी होगी.
लालू नेपथ्य में, इसलिए बदलाव जरूरी
जानकार कहते हैं कि तेजस्वी को अपने परिवार को भी साथ लेना होगा तभी बात बनेगी. बिहार के लोगों और खासकर RJD कार्यकर्ताओं को तेजस्वी के नई टीम का इंतजार है क्योंकि तेजस्वी युवा हैं और लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि RJD में अब नई पीढ़ी का बोलबाला होगा. क्योंकि लालू यादव राजनैतिक रूप से नेपथ्य में चले गए हैं. नीतीश कुमार अपनी अंतिम पारी खेल रहे हैं.
आने वाले दिनों में बिहार में BJP की अगली पीढ़ी के नेता जैसे BJP के नए अध्यक्ष नितिन नबीन, सम्राट चौधरी, JDU से निशांत कुमार, LJP के चिराग पासवान और तेजस्वी यादव के बीच मुकाबला होने वाला है. ऐसे में सबको अपना कदम फूंक-फूंक कर और समझदारी से उठाना पड़ेगा.
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