सुपौल में गजब घोटाला, 7 साल पहले मर चुके मदरसे के शिक्षक ने भी निकाल लिया एरियर; किया 1 करोड़ का घोटाला

यह पूरा विवाद तब खुला जब मदरसा के वर्तमान हेडमास्टर और पूर्व हेडमास्टर के बीच किसी बात को लेकर अनबन हो गई. जब मामला नहीं सुलझा, तो मदरसा के सचिव कलेक्ट्रेट में प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में पहुंच गए और लिखित शिकायत दे दी. पढ़ें सुपौल संवाददाता अभिषेक मिश्रा की यह रिपोर्ट.

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सुपौल: मदरसा हासिमिया में फर्जी तरीके से ₹1 करोड़ की निकासी का आरोप, जांच के लिए पहुंची टीम, पूर्व हेडमास्टर घेरे में.
NDTV Reporter

Bihar Crime News: बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मीनियां पंचायत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. बरमोतरा (वार्ड-01) स्थित मदरसा हासिमिया में 'मरे हुए' शिक्षकों के नाम पर सरकारी खजाने से पैसे निकालने का आरोप लगा है. बताया जा रहा है कि रिटायर हो चुके और दुनिया छोड़ चुके शिक्षकों के जाली दस्तखत कर करीब ₹1 करोड़ की एरियर राशि निकाल ली गई. यह खुलासा तब हुआ जब वर्तमान हेडमास्टर मो. अरशद और पूर्व हेडमास्टर मो. नाजिम अली के बीच इस फर्जीवाड़े को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद मामला अधिकारियों तक जा पहुंचा.

7 साल पहले मर चुके शिक्षक के नाम पर निकाला पैसा

मदरसा के सचिव मो. कासिम के अनुसार, इस मदरसे की स्थापना वर्ष 1977-78 में हुई थी और उस समय 5 शिक्षक कार्यरत थे. सचिव का आरोप है कि पूर्व प्रधानाध्यापक और वर्तमान सहायक शिक्षक मो. नाजिम अली ने इस पूरे खेल को अंजाम दिया है. सचिव का कहना है कि उनके और हेडमास्टर के जाली दस्तखत कर रिटायर शिक्षकों के खातों में 15 से 20 लाख रुपये तक ट्रांसफर किए गए. सबसे अजीब बात यह है कि जिन शिक्षकों के नाम पर यह मोटी रकम निकाली गई, उनमें से एक की मृत्यु 7 साल पहले ही हो चुकी थी. मृत व्यक्ति के नाम पर बैंक खाते का चलना और उसमें सरकारी पैसा आना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है.

कैसे सामने आया यह मामला?

इस मामले को लेकर गत 6 अप्रैल को सचिव मो. कासिम प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में पहुंचे थे. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए. इसके बाद मंगलवार को डीपीओ स्थापना आलोक शेखर और बीईओ सह बीपीआरओ देश कुमार जांच के लिए मदरसा हासिमिया पहुंचे. टीम ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर कागजातों की पड़ताल की. सचिव मो. कासिम ने दावा किया कि रिकॉर्ड्स में मौजूद हस्ताक्षरों का मिलान फर्जी हस्ताक्षरों से नहीं हो पाया है, जिससे घोटाले की आशंका और पुख्ता हो गई है.

MDM में गड़बड़ी का शक, एक्शन में DM

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी मो. नाजिम अली वर्तमान में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना का संचालन भी करते हैं, जिसमें भारी अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं. फिलहाल इस मदरसे में केवल दो ही शिक्षक काम कर रहे हैं, फिर भी इतने बड़े स्तर पर एरियर का भुगतान होना एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है. इस पूरे प्रकरण पर सुपौल के डीएम सावन कुमार ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. डीपीओ स्थापना आलोक शेखर ने बताया कि पुराने रिकॉर्ड्स से हस्ताक्षरों का मिलान कर जल्द ही फाइनल रिपोर्ट सौंपी जाएगी.

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