- बेतिया में स्थित सागर पोखरा के मनोकामना शिव मंदिर में महाशिवरात्रि की भव्य पूजा की तैयारी पूरी कर ली गई है.
- महाशिवरात्रि पर देशभर से पांच सौ विद्वान पंडित सुबह चार बजे से रात्रि तक शिव पूजा और तांडव स्त्रोम करेंगे.
- भगवान शिव के श्रृंगार के लिए उत्तराखंड के गंगोत्री से ब्रह्म कमल, विदेशों से विभिन्न फूल मंगाए गए हैं.
Maha Shivratri 2026 : बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया का ऐतिहासिक मनोकामना शिव मंदिर में महाशिवरात्रि की तैयारी पूरी कर ली गई है. देशभर से महाशिवरात्रि पर अयोध्या, काशी, प्रयागराज और उज्जैन से 500 विद्वान पंडित बुलाये गए हैं, जो सागर पोखरा स्थित शिव मंदिर में सुबह 4:00 बजे से रात्रि तक पूजा पाठ व शिव तांडव स्त्रोम करेंगे. वहीं, इस बार महाशिवरात्रि में भगवान भोलेनाथ के श्रृंगार के लिए उत्तराखंड के गंगोत्री से ब्रह्म कमल मांगे गए हैं. हर चार घंटे पर शिवरात्रि में चार बार अभिषेक और चार बार शृंगार किया जायेगा.
ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और न्यूजीलैंड, कोलकाता, बैंगलोर से मंगाए गए फूल, कमल के फूल, दुब, गुलाब का फूल, रुद्राक्ष, भस्म से भगवान शिव शंकर का श्रृंगार किया जायेगा. वहीं, महाशिवरात्रि के दिन मुंबई से कुणाल मिश्रा, पायल मुखर्जी के साथ देश के अलग- अलग कोने से सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए सैकड़ों कलाकार आ रहे हैं.
देश के कोने-कोने से 500 विद्वान पंडित बुलाए गए हैं
पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में सागर पोखरा के पास एक ऐसा ऐतिहासिक शिव मंदिर है, जहां 13 वर्षों से भक्ति अमित गिरी के द्वारा महाशिवरात्रि की भव्य पूजा की जाती है. शिव मंदिर के मुख्य पुजारी प्रवेश कुमार मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि की पूरी तैयारी कर ली गई है. सुबह से ही पूजा की शुरुआत हो जाती है. महाशिवरात्रि में पूजा के लिए देश के कोने-कोने से 500 विद्वान पंडित बुलाए गए हैं, जो पूजा- पाठ करेंगे.
लाखों की संख्या में शिवभक्त यहां पहुंचते हैं. वहीं, इस बार महाशिवरात्रि में भगवान भोलेनाथ के श्रृंगार के लिए उत्तराखंड के गंगोत्री से ब्रह्म कमल मांगे गए हैं, जिससे भगवान शिव का श्रृंगार किया जायेगा. वहीं ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और न्यूजीलैंड, कोलकाता, बैंगलोर से मंगाए गए फूल, कमल के फूल, दुब, गुलाब का फूल, रुद्राक्ष, भस्म से भगवान शिव शंकर का श्रृंगार किया जायेगा.
मंदिर का मुख्य गेट तिरुपति बालाजी के तर्ज पर बनाया गया
वहीं, मंदिर पूजा समिति के कार्यकर्ता केवल तिवारी ने बताया कि इस बार मंदिर का मुख्य गेट तिरुपति बालाजी के तर्ज पर बनाया गया है जो अपने आप में अद्भुत है. मंदिर के चारों तरफ लाइटिंग की व्यवस्था की गई है जो महाशिवरात्रि की रात में एक अद्भुत नजारा दिखेगा. सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगती है. श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंच जाते हैं. लंबी-लंबी कतारे देखकर पूजा समिति के द्वारा समुचित व्यवस्था की जाती है. एक हजार से ज्यादा पूजा समिति के कार्यकर्ता होते हैं जो मंदिर में आए श्रद्धालुओं पर विशेष ध्यान रखते हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो. मंदिर परिसर के चारों तरफ और शहर में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि महाशिवरात्रि में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो और श्रद्धालुओं की आराम से पूजा हो पाए.
वही, सुबह 9:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक भंडारे की समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि जो श्रद्धालु मंदिर में आए वह भंडारे का प्रसाद ग्रहण करें. महाशिवरात्रि के दिन एक लाख से ज्यादा लोग भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते हैं. हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर तीन लाख से अधिक शिव भक्त शिव बरात में शामिल होते हैं. पूरा शहर शिव भक्तों से उमड़ पड़ता है. शिव की बारात में घोड़े हाथी और सैकड़ों रथ मौजूद रहते हैं. इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के मौके पर भव्य आयोजन किया जा रहा है. मंदिर को फुल से भव्य तरीके से सजाया गया है. महाशिवरात्रि पर इस भी हर वर्ष की भांति भव्य शिव बारात निकाली जाएगी. शिवरात्रि के उपलक्षय में पुरे शहर में शिव बरात के स्वागत में दो लाख से अधिक दीप जलाये जायेंगे। महाशिवरात्रि के मौके पर बरात में शामिल होने बिहार सहित नेपाल, यूपी, मुंबई, दिल्ली, झारखण्ड, बंगाल से शिवभक्त शामिल होते हैं.
जीतेन्द्र कुमार की रिपोर्ट














