राज्यसभा चुनाव : ओवैसी से समर्थन हासिल करने के लिए तेजस्वी ने खेला कौन सा दांव?

तेजस्वी यादव भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. वे लगातार महागठबंधन के दलों, एआईएमआईएम और बीएसपी के नेताओं के संपर्क में हैं. उन्होंने सभी नेताओं की बैठक बुलाई, जिसके बाद आई.पी. गुप्ता के पाला बदलने की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही है.

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  • बिहार में राज्यसभा की 5 सीट के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें एनडीए और विपक्ष के प्रत्याशी शामिल हैं.
  • एनडीए के पास विधानसभा में 202 विधायक हैं, जिससे उन्हें चार सीटें आसानी से मिलने की संभावना है.
  • उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए के खिलाफ नामांकन किया है और क्रॉस-वोटिंग से पांचवीं सीट जीतना चाहते हैं.
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नई दिल्ली:

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान होना है क्योंकि इन पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं. बिहार विधानसभा के गणित के अनुसार दो सीटों पर BJP, दो सीटों पर जेडीयू और यदि पूरा विपक्ष एकजुट रहा तो उसके भी एक प्रत्याशी जीत सकते हैं. बिहार में जेडीयू की तरफ से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर, जबकि बीजेपी से नीतिन नबीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है. लेकिन एनडीए खेमे से उपेंद्र कुशवाहा ने भी नामांकन कर दिया है. वहीं, विपक्ष की तरफ से आरजेडी के मौजूदा सांसद ए.डी.सिंह ने भी अपना पर्चा भरा है. इसका मतलब है कि बिहार में अब राज्यसभा सांसद चुनने के लिए वोटिंग जरूर होगी.

क्रॉस-वोटिंग के सहारे उपेंद्र कुशवाहा

बिहार में एक राज्यसभा सीट के लिए 41 वोटों की आवश्यकता होती है. बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं, जिनमें से एनडीए के पास 202 विधायक हैं. यानी एनडीए चार सीटें आसानी से जीत सकता है. इसके बाद भी एनडीए के पास 38 वोट बच जाते हैं और 5वीं सीट की जीत के लिए उन्हें केवल 3 और वोटों की जरूरत होगी. ये वोट उन्हें क्रॉस-वोटिंग से ही मिल सकते हैं. इसी को देखते हुए एनडीए की सहयोगी पार्टी आरएलएसपी (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने अपना नामांकन भरा है.

विपक्ष के पास भी कुल 41 वोट हैं. महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जबकि एआईएमआईएम के पास 5 और बीएसपी के पास 1 विधायक है. यदि ये सभी एकजुट रहे और आरजेडी के उम्मीदवार अमरेन्द्र धारी सिंह को वोट दें, तो आरजेडी का उम्मीदवार जीत सकता है.

कहां फंसा है मामला?

उपेंद्र कुशवाहा को विपक्ष से तीन वोट चाहिए और उनकी नजर कांग्रेस के छह विधायकों पर है. खासकर उस एक विधायक पर जो अक्सर पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं होते और पहले जेडीयू में भी रह चुके हैं. उपेंद्र कुशवाहा की नजर आईआईपी के आई.पी. गुप्ता और बीएसपी के एक विधायक पर भी है. यदि सरकार की ओर से इन्हें कोई आकर्षक प्रस्ताव मिलता है तो बिहार में क्रॉस-वोटिंग को रोकना मुश्किल हो सकता है.

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इधर, तेजस्वी यादव भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. वे लगातार महागठबंधन के दलों, एआईएमआईएम और बीएसपी के नेताओं के संपर्क में हैं. उन्होंने सभी नेताओं की बैठक बुलाई, जिसके बाद आई.पी. गुप्ता के पाला बदलने की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही है.

अख्तरूल और तेजस्वी के बीच हुई डील

अब रही बात एआईएमआईएम की, वे शुरुआत में अपना उम्मीदवार उतारने की बात कर रहे थे. लेकिन एआईएमआईएम के बिहार अध्यक्ष अख्तरूल ईमान और तेजस्वी यादव की बैठक के बाद एआईएमआईएम ने आरजेडी उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. अंदर की खबर यह है कि तेजस्वी यादव ने एआईएमआईएम को एक विधान परिषद सीट देने का वादा किया है. दिल्ली में भी ओवैसी महागठबंधन के उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कह चुके हैं.

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आरजेडी ने अमरेन्द्र धारी सिंह को इसलिए उम्मीदवार बनाया है, क्योंकि वे अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में सक्षम माने जाते हैं. ए.डी. सिंह ने नामांकन के दौरान 243 करोड़ रुपये की संपत्ति का ब्योरा दिया है. राज्यसभा चुनावों में ऐसी बातें मायने रखती हैं. यहां बाहुबल से ज्यादा धनबल का असर रहता है. राज्यसभा के लिए मतदान 16 मार्च को होगा और उसी दिन शाम में नतीजे भी आ जाएंगे.

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