भारत निर्वाचन आयोग ने 2026 के राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है. इस बार देशभर में 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होंगे. ये सीटें अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों की जगह भरी जाएंगी. बिहार से 5 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है. यह चुनाव भले ही एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया हो, लेकिन बिहार और केंद्र की राजनीति के लिए इसका महत्व काफी बड़ा है. सरकार चाहती है कि राज्यसभा में उसकी संख्या मजबूत हो. बिहार की 5 सीटें इसी राजनीतिक लड़ाई का अहम हिस्सा हैं.
राज्यसभा चुनाव में आम जनता नहीं, बल्कि विधायक वोट डालते हैं. बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं. 5 सीटों के लिए एक उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 41 वोटों की जरूरत होती है. ऐसे में विधानसभा में किस गठबंधन के पास कितनी संख्या है, वही इस चुनाव का नतीजा तय करती है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया. भाजपा को 89 सीटें मिलीं, जबकि जदयू ने 85 सीटों पर जीत दर्ज की. इसके अलावा लोजपा को 19, हम को 5 और आरएलएम को 4 सीटें मिलीं. इस तरह एनडीए की स्थिति विधानसभा में बेहद मजबूत है.
एनडीए के लिए यह चुनाव सिर्फ सीटों का सवाल नहीं है. यह चुनाव यह संदेश देगा कि बिहार में सरकार पूरी तरह मजबूत है और विपक्ष कमजोर स्थिति में है. साथ ही राज्यसभा के जरिए एनडीए अपने वरिष्ठ नेताओं को संसद भेजकर भविष्य की राजनीति भी साध सकता है.वहीं, राजद और कांग्रेस के लिए यह चुनाव बड़ी चुनौती है. महागठबंधन के पास सिर्फ 35 विधायक हैं, जो एक राज्यसभा सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में उनके लिए एक भी सीट जीतना बड़ी राजनीतिक उपलब्धि होगी. राज्यसभा में सीट न मिलने से विपक्ष की आवाज कमजोर पड़ सकती है.
कुल मिलाकर, बिहार की 5 राज्यसभा सीटें सिर्फ संसद की संख्या का मामला नहीं हैं. ये सीटें एनडीए के लिए अपनी ताकत दिखाने का मौका हैं, जबकि राजद और कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक मौजूदगी बचाने की लड़ाई है. इसी वजह से राज्यसभा चुनाव 2026 बिहार की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है.













