Bihar News: बिहार के पूर्णिया से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसे सुनकर पुलिस के भी होश उड़ गए हैं. जिले के धमदाहा थाना क्षेत्र के हरिपुर गांव में पत्तल बनाने की आड़ में एक हाईटेक अवैध मिनी गन फैक्ट्री चल रही थी. इस काले कारोबार को छिपाने के लिए बकायदा जमीन के नीचे 20 फीट गहरा बंकर बनाया गया था.
सोमवार को जब कोलकाता एसटीएफ, बिहार एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक इस घर को घेरा, तो अंदर का नजारा देखकर गांव वाले हैरान रह गए. पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण, लेथ मशीन और 10 अर्धनिर्मित देशी कट्टे बरामद किए हैं. इस मामले में मकान मालिक और मुंगेर के कारीगरों समेत 4 लोगों को दबोचा गया है.
बंकर के अंदर 'लेथ मशीन'
अवैध हथियारों का यह धंधा इतने शातिराना तरीके से चल रहा था कि पिछले 6 महीने से पड़ोसियों को भी लगता था कि यहां पत्तल बनाने का काम होता है. मकान के अंदर एक गुप्त कमरा था, जहां से 20 फीट नीचे जाने के लिए एक छोटा सा रास्ता बनाया गया था. बंकर में उतरने के लिए बांस की सीढ़ी का इस्तेमाल होता था और ऊपर से ढक्कन बंद कर दिया जाता था. हथियार बनाने वाली भारी लेथ मशीन और कटर मशीन चलने पर बहुत तेज आवाज होती है. इस आवाज को बाहर जाने से रोकने के लिए ही जमीन के नीचे यह बंकर तैयार किया गया था.
कोलकाता में सरगना गिरफ्तार
इस पूरी मिनी गन फैक्ट्री का मास्टरमाइंड मुंगेर का नामचीन हथियार तस्कर सूरज है. करीब 10 दिन पहले सूरज इसी फैक्ट्री में बने 10 कट्टे लेकर बेचने के लिए कोलकाता गया था, जहां कोलकाता पुलिस ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया. रिमांड पर पूछताछ के दौरान सूरज टूट गया और उसने पूर्णिया के इस सीक्रेट बंकर का राज उगल दिया. इसके बाद कोलकाता पुलिस ने बिहार एसटीएफ से संपर्क साधा और यह जॉइंट ऑपरेशन चलाया गया.
मुंगेर से मंगाए थे स्पेशल कारीगर
पुलिस की गिरफ्त में आए कारीगरों में मो. आफताब (वासुदेवपुर, मुंगेर) और मो. अनवर (गुलजारपोखर, मुंगेर) शामिल हैं. गिरफ्तार कारीगर आफताब ने बताया, 'सूरज हमें यहां लेकर आया था. मैं पिछले 5-6 सालों से कट्टा बनाने का काम कर रहा हूं. यहां हमें रहने और खाने की मुफ्त सुविधा दी गई थी और हर एक देशी कट्टा तैयार करने के बदले ₹500 की मजदूरी मिलती थी.'
वहीं, मकान मालिक गब्बर मंडल पहले परदेश में मजदूरी करता था, लेकिन हाल ही में गांव लौटकर इस अवैध धंधे में शामिल हो गया था. उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए यह घर मिट्ठू कुमार नाम के शख्स को पत्तल बनाने के नाम पर किराए पर दिया था.
धमदाहा अनुमंडल का इतिहास 90 के दशक तक उग्रवाद से प्रभावित रहा है. यह पहली बार नहीं है जब यहां ऐसी फैक्ट्री मिली हो. इससे पहले 21 मार्च 2023 को भी कुकरौन में एक मिनी गन फैक्ट्री पकड़ी गई थी, जिसका कनेक्शन भी मुंगेर से था. ऐसे में स्थानीय पुलिस को अपने ही इलाके में 6 महीने से चल रही इतनी बड़ी गन फैक्ट्री और बंकर की भनक न लगना, उसकी मुस्तैदी और खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े करता है.
फिलहाल, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि पटना और कोलकाता के अलावा इस नेटवर्क के तार और कहां-कहां जुड़े हैं.
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