- निशांत कुमार ने उपमुख्यमंत्री पद संभालने से इनकार कर खुद का जनाधार बनाने का निर्णय लिया है
- वे अगले तीन से चार महीने बिहार के जिले-जिले में यात्रा कर पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क स्थापित करेंगे
- निशांत जेडीयू कार्यकर्ता के रूप में यात्रा करेंगे और पार्टी के झंडे तले मिलन कार्यक्रम आयोजित करेंगे
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर अब भी तस्वीर साफ नहीं हुई है. जहां यह चर्चा थी कि वे उपमुख्यमंत्री का पद संभालेंगे, ऐन वक्त पर उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसे लेकर कई अटकलें लगाई गईं. यह भी कहा गया कि वे अपने पिता की असमय विदाई से नाराज होकर ऐसा कर रहे हैं. हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने इन अटकलों से साफ इनकार किया है.
खुद का जनाधार बनाना चाहते हैं निशांत कुमार
सूत्रों के अनुसार सम्राट सरकार में शामिल न होने का फैसला निशांत का खुद का ही था. वे यह नहीं चाहते थे कि लोग उन्हें राजनीति में अनुभवहीन होने के कारण आड़े हाथों लें. यह उनका स्वयं का निर्णय है कि वे जमीनी हालात टटोलकर और स्वयं का जनाधार बना कर आगे बढ़ेंगे.कोई भी बड़ी जिम्मेदारी लेने से पहले वे खुद को तैयार करना चाहते हैं. यही कारण है कि अगले तीन से चार महीने उन्होंने पूरे बिहार में यात्रा करने का फैसला किया है, यह यात्रा तीन मई शुरू की जा रही है.
बिहार के जिले-जिले घूमेंगे निशांत कुमार
अब वे जनता दल यूनाइटेड के सक्रिय सदस्य हैं. हालांकि हाल ही में उनके पिता के फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद गठित पदाधिकारियों की टीम में उन्हें जगह नहीं मिली है इसलिए वे जेडीयू कार्यकर्ता की हैसियत से ही इस यात्रा पर निकलने जा रहे हैं. इस यात्रा का उद्देश्य जमीनी कार्यकर्ताओं से संपर्क स्थापित करना है. इस दौरान वे पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के पार्टी के पदाधिकारियों से संपर्क साधेंगे. हर जिले में उनके साथ यात्रा में कुछ लोग रहेंगे और पार्टी के झंडे तले मिलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. वे हर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों और महापुरुषों के स्थानों का भी दौरा करेंगे. इसी तरह अपने पिता के मुख्यमंत्री रहते हुए उस जिले में किए गए विकास कार्यों का भी जायजा लेंगे ताकि पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश साफ तौर पर दिया जा सके.
विधान परिषद का सदस्य बन सकते हैं निशांत कुमार
जनता दल यूनाइटेड के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, निशांत जेडीयू का भविष्य हैं. पार्टी की कमान उन्हीं के हाथों में जाएगी. इसी लिए खुद को तैयार करने के लिए यात्रा करने का उनका फैसला राजनीतिक रूप से भी बेहद सटीक है. जहां तक औपचारिक रूप से कोई पद लेने की बात है, सही समय पर इसका निर्णय होगा. यह यात्रा समाप्त होने के बाद ही वे तय करेंगे कि सरकार या संगठन में उनकी क्या भूमिका रहेगी. यह संभावना है कि जून में वे विधान परिषद के सदस्य बन जाएं और उसके बाद सरकार में भी उन्हें कोई भूमिका दी जाए.
जेडीयू नेताओं के अनुसार, निशांत नहीं चाहते कि उन्हें थोपा हुआ नेता माना जाए. इसीलिए वे कार्यकर्ताओं के बीच जाकर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाएंगे. बिहार की राजनीति में ही ऐसे कई उदाहरण हैं जहां पिता की विरासत को बेटों ने बढ़ाने की कोशिश की लेकिन वे उसमें कामयाब नहीं हो सके. निशांत उस तरह की असफलता का जोखिम नहीं उठा सकते क्योंकि वे भी भलीभांति जानते हैं कि उनके पिता के बाद जनता दल यूनाइटेड को एकजुट रखना कितनी बड़ी चुनौती होगी.














