- बंधुआ स्टेशन के पास ट्रेन में लगी आग
- लोको पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
गया-कोडरमा रेलखंड पर रविवार को एक बड़ा रेल हादसा टल गया, जब पटना-रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस के एक कोच के पहिए से अचानक धुआं और आग की लपटें उठने लगीं. कोच के पहिए में आग लगने से बंधुआ स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, समय रहते रेलकर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया. जिस समय यह घटना हुई, उस समय पटना रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12365) बंधुआ स्टेशन के समीप अपनी निर्धारित रफ्तार से आगे बढ़ रही थी.
ब्रेक बाइंडिंग के कारण लगी आग
जानकारी के अनुसार, बी-16 कोच (बोगी नंबर EC 246998) के पहिए में ब्रेक बाइंडिंग के कारण अत्यधिक घर्षण हुआ, जिससे पहिए से धुआं निकलने लगा और देखते ही देखते उसमें आग की लपटें भी दिखाई देने लगीं. स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया. ट्रेन के रुकते ही यात्रियों में हड़कंप मच गया.
रेलकर्मियों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
कई यात्री घबराकर कोच से उतरकर प्लेटफॉर्म और ट्रैक की ओर भागने लगे. इस दौरान कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालांकि, मौके पर मौजूद रेलकर्मियों ने तेजी से स्थिति को संभाल लिया. लोको पायलट, गार्ड और टीटीई ने बिना समय गंवाए फायर सेफ्टी उपकरणों की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया. इसी बीच स्टेशन पर तैनात स्टेशन अधीक्षक (एसएस) बाबू कुमार और पाइंट मैन महेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंच गए और सभी ने मिलकर संयुक्त प्रयास से आग पर काबू पा लिया.
घटना के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने यात्रियों को शांत कराया और उन्हें भरोसा दिलाया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. इससे यात्रियों में फैली घबराहट धीरे-धीरे कम हुई. करीब 25 से 30 मिनट तक ट्रेन बंधुआ स्टेशन पर खड़ी रही. इस दौरान तकनीकी टीम ने संबंधित कोच और पहिए की गहन जांच की.
सुरक्षा जांच के बाद दोबारा ट्रेन रवाना
जांच में यह सुनिश्चित किया गया कि आगे की यात्रा सुरक्षित है. सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि होने के बाद ट्रेन को दोबारा रांची के लिए रवाना कर दिया गया. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह घटना ब्रेक बाइंडिंग के कारण हुई, जिससे पहिए में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न हो गई थी. समय रहते लोको पायलट और रेलकर्मियों की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया, अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती थी.
यह भी पढे़ं














