पटना हाईकोर्ट का एक नोटिस और बिहार की राजनीति में आ गया सियासी भूचाल, जानिए पूरा मामला

Bihar News: पटना हाईकोर्ट ने राज्य के कई विधायकों को नोटिस जारी किया है. ये नोटिस उस याचिका पर दी गई है जिसमें प्रतिनिधियों पर चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं.

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बिहार के कई विधायकों को हाईकोर्ट ने जारी किया है नोटिस
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  • पटना हाईकोर्ट ने बिहार के कई विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है
  • विधायकों पर चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है
  • हाईकोर्ट के नोटिस के बाद राज्य में सियासी भूचाल आया हुआ है, पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के विधायक शामिल
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नई दिल्ली:

बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब पटना उच्च न्यायालय ने चुनावी हलफनामे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को गंभीर मानते हुए 28 विधायकों को नोटिस जारी कर दिया. अदालत ने इन सभी से जवाब मांगा है कि उन्होंने चुनाव के समय जो शपथपत्र दिया था, उसमें दी गई जानकारी सही है या नहीं. यदि आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित विधायकों की सदस्यता पर खतरा पैदा हो सकता है. इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और चिंता दोनों बढ़ गई है.

विधानसभा अध्यक्ष का भी नाम 

सूत्रों के अनुसार जिन प्रमुख विधायकों के नाम इस मामले में सामने आए हैं, उनमें विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, बीजेपी विधायक जीवेश कुमार, जेडीयू विधायक चेतन आनंद और राजद विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह शामिल बताए जा रहे हैं. इनके अलावा भी कई अन्य विधायकों को नोटिस मिलने की खबर है, हालांकि पूरी आधिकारिक सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है.

विधायकों पर जानकारी छिपाने का आरोप 

दरअसल, चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को नामांकन के समय एक हलफनामा देना होता है. इसमें उसे अपनी पढ़ाई, उस पर दर्ज आपराधिक मामलों, अपनी चल और अचल संपत्ति, बैंक कर्ज और अन्य देनदारियों की पूरी जानकारी देनी होती है. यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि मतदाता अपने उम्मीदवार के बारे में पूरी सच्चाई जान सकें और सही फैसला कर सकें. आरोप है कि कुछ विधायकों ने इस हलफनामे में पूरी जानकारी नहीं दी या कुछ बातें छिपा लीं.

विधायकों को देना होगा जवाब 

इन आरोपों को लेकर चुनाव हार चुके कुछ उम्मीदवारों और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका कहना है कि यदि कोई उम्मीदवार गलत जानकारी देकर चुनाव जीतता है तो यह लोकतंत्र के साथ अन्याय है. अदालत ने शुरुआती सुनवाई के बाद पाया कि मामला गंभीर है और इसकी जांच जरूरी है. इसी आधार पर संबंधित विधायकों को नोटिस भेजा गया है. अब सभी को अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा.


आरोप सही तो सदस्यता जा सकती है 

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि यह साबित हो जाता है कि हलफनामे में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी, तो जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. ऐसी स्थिति में संबंधित विधायक की सदस्यता रद्द भी की जा सकती है. हालांकि अभी केवल नोटिस जारी हुआ है और अंतिम फैसला सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा. इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस पर क्या असर पड़ेगा.

विधायक बोले- अदालत में रखेंगे अपना पक्ष 

राजनीतिक नजरिए से यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इसमें अलग-अलग दलों के नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं. इससे यह साफ है कि मामला किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है. विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी ईमानदारी से जोड़ रहा है, जबकि संबंधित नेता कह रहे हैं कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया और वे अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे. उनका कहना है कि अगर किसी प्रकार की तकनीकी गलती हुई भी है तो वह जानबूझकर नहीं की गई.

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इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सबकी नजर पटना उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई पर है. यदि अदालत को विधायकों का जवाब संतोषजनक नहीं लगता, तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल इतना तय है कि इस कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि चुनावी हलफनामे में सच्चाई और पारदर्शिता जरूरी है और इसमें लापरवाही या गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जाएगा.

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