'बंगाल में कोई सुरक्षित नहीं', बिहार के मंत्री का बड़ा बयान, मालदा कांड पर ममता सरकार को घेरा

बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. चुनाव आयोग के निर्देश पर NIA ने जांच संभाल ली है. इस बीच बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला है.

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बंगाल में 'अपराधियों का राज', मालदा कांड पर बरसे मंत्री रामकृपाल यादव; अब NIA करेगी हिसाब. (फाइल फोटो)
IANS

Patna News: पश्चिम बंगाल के मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. इस मामले पर शुक्रवार को बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बंगाल की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि वहां अब कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं रह गया है. मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि बंगाल में कानून का राज समाप्त हो चुका है और अब वहां अपराधियों का राज कायम है.

'अब केंद्र के हाथ में कमान'

पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए रामकृपाल यादव ने मालदा कांड की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंपे जाने के फैसले को सही ठहराया. उन्होंने कहा कि अब यह मामला केंद्र के नियंत्रण में रहेगा और राज्य सरकार के दखल से बाहर होगा. मंत्री का मानना है कि केंद्रीय एजेंसी के आने से ही वहां लोग सुरक्षित रहकर अपना काम कर सकेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि जो लोग भी इस शर्मनाक घटना में शामिल हैं, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

जनता उखाड़ फेंकेगी ऐसी सरकार

आने वाले चुनावों का जिक्र करते हुए रामकृपाल यादव ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बंगाल में कानून का राज समाप्त है. अपराधियों का राज कायम है. वहां कोई आदमी सुरक्षित नहीं है. जो सरकार नियम-कानून को ताक पर रखकर काम करती है, उसे राज्य की जनता आने वाले चुनाव में उखाड़ फेंकेगी. मंत्री के अनुसार, बंगाल में चुनाव का काम भी ढंग से नहीं हो पा रहा है, लेकिन यह स्थिति बहुत दिन तक चलने वाली नहीं है. उन्होंने दावा किया कि नई सरकार ही बंगाल में कानून का राज स्थापित कर लोगों को अमन-चैन देने का काम करेगी.

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आखिर मालदा में उस रात हुआ क्या था?

मामला बीते बुधवार का है, जब मालदा के कालियाचक में SIR का काम चल रहा था. इस दौरान कुछ लोगों के नाम लिस्ट से हटाए जाने पर भीड़ उग्र हो गई. प्रदर्शनकारियों ने तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक एक ब्लॉक ऑफिस में बंधक बनाए रखा. हैरानी की बात यह है कि इन अधिकारियों को न खाना मिला और न पानी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच करेगी NIA

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे न्याय प्रशासन में बाधा डालने की एक ढीठ कोशिश करार दिया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने मामले की जांच NIA को सौंप दी है. एजेंसी की टीम आज मालदा पहुंचकर प्रभावित अधिकारियों से बात करेगी. सूत्रों की मानें तो NIA उन 18 आरोपियों से भी पूछताछ कर सकती है जिन्हें बंगाल पुलिस ने अब तक गिरफ्तार किया है. इन गिरफ्तार लोगों में एक राजनीतिक दल का उम्मीदवार भी शामिल है.

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चुनाव आयोग सख्त, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पूर्व चुनाव अधिकारी मोहम्मद अमीन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे शर्मनाक बताया है. फिलहाल, चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति के कहीं भी भीड़ इकट्ठा होने या जुलूस निकालने पर सख्त पाबंदी है. राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को भी कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब सबकी नजरें 6 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर हैं, जब NIA अपनी पहली रिपोर्ट पेश करेगी.

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