- बिहार में CM पद परिवर्तन की अटकलों के बीच नौकरशाही में अनिश्चितता और बेचैनी की स्थिति उत्पन्न हो रही है
- नई सरकार आने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग और जिम्मेदारियों में बड़े पैमाने पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है
- गृह, सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग में सबसे पहले बदलाव हो सकते हैं, जो प्रशासनिक फैसलों के लिए महत्वपूर्ण हैं
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने की अटकलों के साथ ही बिहार की नौकरशाही में हलचल तेज होती दिख रही है. सत्ता परिवर्तन की संभावना ने प्रशासनिक गलियारों में एक तरह की अनिश्चितता पैदा कर दी है. खासकर उन अधिकारियों के बीच बेचैनी ज्यादा है, जिन्हें अब तक मुख्यमंत्री के करीबी के तौर पर देखा जाता रहा है. कई विभागों में यह भी देखा जा रहा है कि बड़े फैसलों को फिलहाल टाला जा रहा है और अधिकारी नई राजनीतिक स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं.दरअसल, बिहार में लंबे समय तक एक ही नेतृत्व के तहत काम करने के कारण नौकरशाही की एक खास कार्यशैली बन गई है.
योजनाओं को लागू करने से लेकर जिलों में कानून-व्यवस्था संभालने तक, कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका तय रही है. उन्हें सरकार की प्राथमिकताओं और काम करने के तरीके की अच्छी समझ रही है.लेकिन अगर सत्ता का केंद्र बदलता है और भाजपा का मुख्यमंत्री आता है,तो कामकाज के तरीके और प्राथमिकताओं में बदलाव होना तय माना जा रहा है.राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग का मामला नहीं होगा, बल्कि नई सरकार अपनी टीम बनाने की कोशिश करेगी.
विभागों में भी फेरबदल की आशंका
सूत्रों के अनुसार गृह विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सबसे पहले बदलाव हो सकते हैं. ये विभाग सरकार के लिए बेहद अहम माने जाते हैं, क्योंकि यहीं से प्रशासनिक फैसले लागू होते हैं. इसके अलावा जिलों में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के स्तर पर भी बड़े पैमाने पर फेरबदल हो सकता है.राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भाजपा का नेतृत्व आता है, तो वह काम के आधार पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर ज्यादा जोर दे सकती है. यानी जिन अधिकारियों का काम बेहतर माना जाएगा, उन्हें महत्वपूर्ण पद मिल सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों को कम अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है.इससे प्रशासन में तेजी लाने का संदेश देने की कोशिश हो सकती है.
नौकरशाहों के अंदर भी दिख रहा है अलग सा डर
चुनावी नजरिए से भी नौकरशाही में बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ऐसे अधिकारियों को जिलों में तैनात करना चाहेगी, जो कानून-व्यवस्था संभालने और योजनाओं को तेजी से लागू करने में सक्षम हों. खासकर अपराध प्रभावित इलाकों और बड़े शहरों में सख्त छवि वाले अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा सकती है.नौकरशाही के भीतर यह डर भी है कि नई राजनीतिक टीम अपने भरोसेमंद अधिकारियों को आगे लाना चाहेगी. इससे अभी प्रभावी भूमिका निभा रहे कई अधिकारियों का प्रभाव कम हो सकता है या उन्हें कम महत्वपूर्ण पदों पर भेजा जा सकता है.
प्रशासनिक स्तर पर भी हो सकते हैं कई बड़े बदलाव
खासकर वे अधिकारी, जिन्हें मौजूदा नेतृत्व के करीब माना जाता रहा है, उनके लिए स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है.हालांकि, कुछ अधिकारी इसे सामान्य प्रक्रिया मान रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार बदलने पर प्रशासन में बदलाव होना स्वाभाविक है. हर नई सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार टीम बनाती है, इसलिए इसे असामान्य नहीं माना जाना चाहिए.फिलहाल स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि संभावित सत्ता परिवर्तन की चर्चा ने बिहार की नौकरशाही को सतर्क कर दिया है. आने वाले दिनों में अगर नेतृत्व बदलता है, तो प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, और इसी संभावना को लेकर अधिकारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है.
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