दिल्ली-कोलकाता को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-19 (NH-19) पर बीते दो दिनों से स्थिति नारकीय बनी हुई है. रोहतास जिले में हाईवे के दोनों ओर लगभग 25 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई है. यह सिर्फ एक ट्रैफिक जाम नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों और ट्रक ड्राइवरों के लिए एक गंभीर मानवीय संकट में बदल गया है.
सोन नदी के पुल में खराबी बनी जाम की वजह
इस भीषण जाम का मुख्य कारण सिक्स लेन निर्माण या टोल प्लाजा की भीड़ नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे में आई तकनीकी खराबी है. वर्ष 2004 में सोन नदी पर बने नए पुल के 'एक्सपेंशन जॉइंट' में तकनीकी खराबी आ गई है. सुरक्षा को देखते हुए पुल के एक हिस्से को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. फिलहाल पुराने पुल से ही वाहनों को निकाला जा रहा है, जिससे दबाव बढ़ने के कारण यातायात रेंगने को मजबूर है.
भूख, प्यास और बेबसी: यात्रियों की आपबीती
पिछले 48 घंटों से हाईवे पर फंसे लोगों की स्थिति दयनीय है. ट्रक चालकों का कहना है कि गाड़ियों में रखा राशन खत्म हो चुका है और आसपास खाने-पीने का कोई प्रबंध नहीं है.
बनारस से बोधगया और बराबर पहाड़ियों की सैर पर निकले विदेशी पर्यटकों का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है. पर्यटकों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी निराशा है. घंटों तक इंजन चालू रखने के कारण कई वाहनों का डीजल-पेट्रोल खत्म होने की कगार पर है, जिससे गाड़ियां बीच सड़क पर खड़ी होने का डर सता रहा है.
परीक्षार्थियों का टूटा सपना
इस महाजाम का सबसे दुखद पहलू सोमवार को इंटरमीडिएट की परीक्षा देने जा रहे छात्रों के साथ दिखा. जाम में फंसने के कारण दर्जनों परीक्षार्थी समय पर अपने केंद्रों तक नहीं पहुंच सके. परीक्षा से वंचित होने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्यक्त किया है और पुनर्परीक्षा की मांग की है.
प्रशासन और NHAI का क्या है कहना?
जाम की भयावहता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रंजीत कुमार वर्मा ने स्थिति स्पष्ट की है. सोन नदी के पुल के एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी है. पुराने पुल पर अत्यधिक दबाव के कारण जाम लगा है. हमारा लक्ष्य है कि मंगलवार तक मरम्मत पूरी कर ली जाए, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सकेगा.














