- बिहार कैबिनेट ने मंत्रियों और विधायकों को दो-दो आवास allot करने का प्रस्ताव मंजूर किया है.
- मंत्रियों को क्षेत्रीय और भवन निर्माण विभाग से आवंटित आवास दोनों प्रदान किए जाएंगे.
- राजद इस फैसले को अनर्गल और अनुचित बताते हुए मंत्रियों को दो आवासों की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं.
बिहार में मंत्रियों और विधायकों को अब दो-दो आवास मिलेंगे. कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. मंगलवार को नीतीश कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया कि मंत्रियों को भवन निर्माण विभाग की तरफ से मंत्रियों के लिए आवंटित आवास के अलावा, उनके क्षेत्र के लिए आवंटित आवास भी दिया जा सकता है. इसके लिए उन्हें एक तय राशि देनी होगी. इसके अलावा विधानसभा, विधान परिषद के वरिष्ठ सदस्यों, जो मंत्री नहीं हैं, उन्हें भी दो आवास मिल सकेगा. भवन निर्माण विभाग ने इसके लिए 15 आवास चिन्हित किए हैं. इस आवास के लिए सदस्यों को किराया देना होगा.
राजद ने फैसले पर उठाए सवाल! मंत्रियों को क्यों चाहिए दो आवास?
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने फैसले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि आखिर मंत्रियों को दो आवास क्यों चाहिए? मंत्रियों को सरकारी काम - काम में सुविधा के लिए आवास दिया जाता है. विधायकों को विधाई कार्य के लिए. एक आवास से ऐसा क्या काम छूट रहा है कि दूसरे आवास की जरूरत है? क्योंकि राज्यसभा, लोकसभा के सदस्यों को पटना में मिले आवास पर सवाल उठ रहे हैं , इसलिए यह फैसला लिया गया है. यह फैसला अनर्गल, अनुचित और अनैतिक है.
असंतुष्टों को साधने के लिए लिया गया फैसला!
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय इस फैसले को असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश के रूप में देखते हैं. उन्होंने कहा कि मंत्रियों को पहले भी दो आवास मिलते रहे हैं लेकिन इस फैसले से अब उसे नियमबद्ध कर दिया गया है. जिन वरिष्ठ नेताओं को मंत्री नहीं बनाया जायेगा, उन्हें ऐसे बंगला देकर साधने की कोशिश की जाएगी. अगर इसमें पहली बार के विधायकों को भी आवास मिलता है तो इसे जोड़ - तोड़ से जोड़ कर देखा जाएगा और इस पर राजनीति भी तेज होगी.
आवास विवाद के बीच लिया गया फैसला
यह फैसला तब लिया गया है जब राबड़ी देवी को आवंटित बंगले को लेकर सियासत तेज है. राजद उनके बंगले का पता बदलने को द्वेषपूर्ण कार्रवाई बता चुकी है. राजद का आरोप है कि लालू परिवार को परेशान करने के लिए यह फैसला लिया गया है. राबड़ी देवी के आवास बदले जाने के बाद राजद ने लोकसभा, राज्यसभा के सदस्यों को पटना में मिले आवास पर सवाल खड़े किए.














