- बिहार विधान परिषद में मंत्री अशोक चौधरी और RJD सदस्य सुनील सिंह के बीच दो दिन से लगातार बहस और टकराव जारी है.
- धान खरीद और सरकारी नीतियों को लेकर उठाए गए सवालों पर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर कड़ी टिप्पणियां कीं.
- अशोक चौधरी की डिग्री को लेकर विवाद बढ़ा और उन्होंने आरोप लगाने वालों से सबूत प्रस्तुत करने की मांग की.
बिहार विधान परिषद में मंत्री अशोक चौधरी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सदस्य सुनील सिंह के बीच टकराव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार के बाद बुधवार यानी आज भी सदन की कार्यवाही के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली. लगातार दूसरे दिन हुए इस टकराव से यह साफ हो गया कि मामला सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि राजनीतिक तनाव का रूप ले चुका है. बुधवार को भी कार्यवाही के दौरान जैसे ही पूरक सवालों का दौर शुरू हुआ, माहौल फिर गरमा गया.
धान खरीद और सरकारी की नीतियों को लेकर उठे सवाल
धान खरीद और सरकार की नीतियों को लेकर उठे सवालों पर मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए पहले के 15 वर्षों की स्थिति का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस दौर में धान की खरीद की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी. मंत्री के इस बयान को विपक्ष ने फिर से राजद शासन पर सीधा हमला माना.
मंत्री ने 15 साल पहले की घटना बताई, सुनील सिंह ने राजद से जोड़ा
इसके बाद राजद सदस्य सुनील सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि उनकी समझ और बुद्धि पर सवाल खड़ा करना ठीक नहीं है. उन्होंने दोहराया कि अगर जरूरत पड़ी तो वह डिग्री से जुड़े सवालों पर भी खुलकर बात कर सकते हैं. सुनील सिंह के इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्य नाराज हो गए और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया.
अशोक चौधरी के डिग्री को लेकर उठे सवाल तो बढ़ा हंगामा
मंत्री अशोक चौधरी ने गुस्से में जवाब देते हुए कहा कि अगर उनकी डिग्री पर सवाल उठाया जा रहा है तो उसे साबित किया जाए. उन्होंने कहा कि बिना सबूत आरोप लगाना गलत है और अगर आरोप साबित नहीं हुए तो आरोप लगाने वाले को सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए. इस बयान के बाद सदन में फिर हंगामा बढ़ गया.
मंत्री विजय चौधरी को करना पड़ेगा हस्तक्षेप
बुधवार को भी मंत्री विजय चौधरी ने सदन में कहा कि किसी भी सदस्य को बिना दस्तावेज और नियम के तहत आरोप लगाने का अधिकार नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और व्यक्तिगत आरोपों से बचना चाहिए.
दो दिनों से लगातार हो रही नोकझोंक
लगातार दो दिनों तक हुई इस नोकझोंक ने बिहार विधान परिषद के माहौल पर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह टकराव केवल धान खरीद या पूरक सवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहराते अविश्वास का नतीजा है. अशोक चौधरी और सुनील सिंह के बीच पहले भी सदन में तीखी बहस होती रही है, लेकिन लगातार दो दिन तक ऐसा होना असामान्य माना जा रहा है.
धान खरीद बिहार की राजनीति का संवेदनशील मुद्दा है. सरकार इसे अपनी उपलब्धि बताती है, जबकि विपक्ष जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं का हवाला देकर सरकार को घेरता है. इसी टकराव के दौरान बहस कई बार नीतिगत मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच जाती है.
हंगामे के कारण जरूरी मुद्दों पर चर्चा हो रही प्रभावित
सदन के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि अगर ऐसे टकराव इसी तरह चलते रहे, तो जरूरी मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होगी. लगातार हो रहे हंगामे से न केवल सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है, बल्कि जनता से जुड़े सवाल भी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं.
कुल मिलाकर, मंगलवार के बाद बुधवार को भी मंत्री अशोक चौधरी और राजद सदस्य सुनील सिंह के बीच हुआ टकराव यह संकेत देता है कि बिहार विधान परिषद में सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सदन की कार्यवाही सामान्य हो पाती है या यह टकराव आगे भी जारी रहता है.
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