बिहार के नए CM के लिए महिला मतदाताओं को एकजुट रखना होगा बड़ा चैलेंज, जानें- क्‍या-क्‍या चुनौतियां?

नीतीश कुमार ने बिहार में महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सहायता से जोड़कर जेंडर आधारित वोट बैंक बनाया. इस रणनीति से उनकी चुनावी सफलता हुई. शराबबंदी की नीति नए मुख्यमंत्री के लिए चुनौती बनेगी, क्योंकि इससे राजस्व प्रभावित होता है और महिलाओं का समर्थन भी अहम है.

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नीतीश गए, नए सीएम के लिए महिला मतदाताओं को एकजुट रखना चुनौती...
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  • नीतीश कुमार ने महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा, आर्थिक आजादी और राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए कई योजनाएं चलाईं
  • बिहार में महिलाओं को साइकिल योजना, जीविका आर्थिक सहायता और पांच हजार रुपए रोजगार निधि जैसी योजनाओं से लाभ मिला
  • शराबबंदी ने महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिया लेकिन नए मुख्यमंत्री के लिए इसे बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा
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पटना:

"जब हम पढ़ते थे, तो हमें साइकिल भी मिला. अब रोजगार के लिए भी 10 हजार रुपए भी मिले हैं. साइकिल मिला, तो हाई स्कूल जाकर पढ़ पाए, अब रोजगार कर के अपने बच्चों को और अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे." 30 साल की रीता देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करते हुए बताया था कि उन्हें अपने जीवन के अलग-अलग फेज में नीतीश सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं का कितना लाभ मिला. 20 साल के अंतराल में पढ़ाई, शादी से लेकर अब रोजगार तक के लिए रीता देवी को किसी न किसी सरकारी योजना से पैसे मिले हैं. इसलिए वे प्रधानमंत्री मोदी से बात करते हुए नीतीश कुमार की तारीफ कर रही थीं. रीता अकेली ऐसी महिला नहीं हैं. इनकी तादाद लाखों में है और नीतीश कुमार ने जातियों से परे महिलाओं को एक अलग वोट बैंक बनाया. नीतीश ने जाति के शोर के बीच जेंडर बेस्ड वोटर तैयार किया. इसलिए जब-जब महिलाओं ने अधिक वोट किया, नीतीश को बंपर जीत मिली. महिलाओं ने वोटिंग में उदासीनता दिखाई तो नीतीश के हिस्से हार आई. नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ रहे हैं. इसलिए नए मुख्यमंत्री के सामने इन मतदाताओं को साधना सबसे बड़ी चुनौती होगी. 

जाति के शोर के बीच जेंडर बेस्ड वोट बैंक 

नीतीश कुमार ने महिलाओं को सुरक्षा, शिक्षा, आर्थिक आजादी से लेकर राजनीतिक हिस्सेदारी दिलाने तक में अहम भूमिका निभाई. 2006 में पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला बिहार पहला राज्य बना. साइकिल योजना ने लड़कियों को स्कूल पहुंचाया, 2007 में लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट 25% था जो अब घटकर 5% से नीचे आ गया. जीविका से महिलाओं को आर्थिक मदद मिली. 2016 में लागू हुई शराबबंदी का राज्य के राजस्व पर असर पड़ा, लेकिन यह चुनावों में नीतीश का सुरक्षा कवच बना. घरेलू हिंसा में कमी को महिलाओं ने नीतीश का तोहफा माना और बदले में वोट का रिटर्न गिफ्ट दिया. बीते चुनाव से पहले डेढ़ करोड़ महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपए देने का ऐलान गेम चेंजर हुआ. तभी रीता देवी जैसी महिला को जीवन के अलग-अलग फेज में नीतीश की योजनाओं का लाभ मिला और जाति के शोर के बीच जेंडर बेस्ड वोट बैंक तैयार हुआ. 

शराबबंदी पर फैसला मुश्किल! 

बिहार में यह चर्चा आम है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद शराबबंदी पर नए सिरे से विचार हो सकता है. एनडीए के बीच भी इसकी मांग होती रही है. जीतनराम मांझी से लेकर अन्य नेता शराबबंदी हटाने के पक्ष में हैं. राज्य की आर्थिक स्थिति एक बड़ी वजह है. नए मुख्यमंत्री के लिए शराबबंदी पर फैसला लेना बड़ी चुनौती होगी. शराबबंदी हटी तो राजस्व आएगा, लेकिन महिला मतदाताओं की नाराजगी भी सरकार के हिस्से आ सकती है. 

रोजगार के लिए 2 लाख कैसे देगी सरकार?

राज्य में डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं को रोजगार के लिए 10 हजार रुपए दिए गए हैं. कहा गया था कि इससे वे रोजगार शुरू करेंगी, सरकार प्रशिक्षण देगी और फिर चयनित महिलाओं को 2 लाख रुपए तक की राशि दी जाएगी. अभी 2 लाख रुपए देने की शुरुआत नहीं हुई है. लेकिन जानकार मानते हैं कि सरकार के लिए महिलाओं का चयन करना मुश्किल होगा. अगर एक समूह की एक महिला को यह राशि मिली और बाकियों को नहीं तो उससे नाराजगी बढ़ेगी. सभी को राशि दी नहीं जा सकती, क्योंकि बैंक इतना ज्यादा लोन दे नहीं सकता. एक डर इस राशि के डूबने का भी है, क्योंकि प्रशिक्षण के नाम पर इन महिलाओं को कुछ नहीं मिला. इस खतरे के बीच दो लाख रुपए की राशि बांटना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. 

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नीतीश से बड़ी लकीर खींचने की चुनौती

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय बताते हैं कि नए मुख्यमंत्री को इन मतदाताओं को साधने के लिए नीतीश से बड़ी लकीर खींचनी होगी. ऐसी स्कीम लानी होंगी, जो नई हो, जिससे लगे कि यह महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और स्वरोजगार की छोटी कोशिश से आगे लेकर जा सकती है. यह करना आसान नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं कर पाए तो इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा.

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