जिस मां ने भीख मांगकर बेटे को पाला, उसी ने कुदाल से काटकर मार डाला, 10 साल बाद कलयुगी बेटे को उम्रकैद

कटिहार में 10 साल पहले भीख मांगकर पालने वाली अपनी ही मां की कुदाल से हत्या करने वाले शराबी बेटे को अदालत ने उम्रकैद और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है, जिससे लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला.

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  • बिहार के कटिहार कोर्ट ने बेटे द्वारा मां की कुदाल से हत्या के मामले में आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई
  • हत्या का मामला वर्ष 2016 का है जहां शराब पीने वाले बेटे ने अपनी मां की बेरहमी से हत्या की थी
  • मां ने भीख मांगकर अपने बेटे को पाला था, लेकिन बड़ा होकर वह शराब का आदी बन गया था
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बिहार की कटिहार कोर्ट ने एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. जिस मां ने दर-दर भटककर और भीख मांगकर अपने बेटे को पाला-पोसा, उसी बेटे ने कुदाल से काटकर अपनी मां की निर्मम हत्या कर दी थी. ममता का कत्ल करने वाले इस निर्दयी बेटे को अदालत ने अब उम्रकैद की सख्त सजा सुनाई है. इस सनसनीखेज मामले में 10 साल के लंबे इंतजार के बाद इंसाफ मिला है.

क्या है पूरा मामला?

यह रूह कंपा देने वाली घटना बारसोई थाना क्षेत्र के बलसर गांव की है. साल 2016 में बेटे मुकेश नोनिया ने अपनी ही मां हेमसरी देवी की कुदाल से मारकर बेरहमी से हत्या कर दी थी. मां ने भीख मांगकर अपने बेटे को पाल-पोस कर बड़ा किया था. दोनों साथ ही मिलकर खाते-पीते थे. लेकिन बेटा बड़ा होकर शराब पीने लगा. बेटे ने ही एक दिन अपनी मां का कत्ल कर दिया. घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और वह पिछले 10 सालों से न्यायिक हिरासत में जेल के अंदर था.

कोर्ट ने 10 साल सुनाया फैसला

कटिहार कोर्ट के थर्ड एडीजे सुनील कुमार सिंह की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया है. अदालत ने हत्या के इस मामले आरोपी बेटे मुकेश को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. 

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8 गवाहों के बयान और सबूतों ने दिलाया इंसाफ

मामले की जानकारी देते हुए अपर एडिशनल पीपी पंचानंद सिंह ने बताया कि केस के ट्रायल के दौरान न्यायालय में इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) और डॉक्टर समेत कुल 8 गवाहों की गवाही हुई. सभी गवाहों ने अपना समर्थन किया. अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपराध को पूरी तरह साबित माना और न्याय हित में यह सख्त सजा सुनाई. उन्होंने कहा कि इस फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा. एक मां और बेटे का जो पवित्र रिश्ता होता है, उसे एक शराबी बेटे ने कलंकित किया है. कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार को 10 साल बाद आखिरकार न्याय मिल गया है.

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