Analysis: बिहार में किसे नुकसान पहुंचाएंगे प्रशांत किशोर? एक्सपर्ट्स से जानें जन सुराज का कितना असर

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज क्या गुल खिलाएंगी... इस पर रविवार को एनडीटीवी पर खास प्रोग्राम में गंभीर चर्चा हुई. पत्रकारों के साथ-साथ एक्सपर्ट ने क्या कुछ कहा, जानिए.

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बिहार चुनाव पर बात करतें एक्सपर्ट.
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  • बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार आज समाप्त हो गया है और नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे.
  • वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषकों ने NDTV पर बिहार चुनाव के बढ़ते वोटिंग % और प्रशांत किशोर के प्रभाव पर चर्चा की.
  • BJP सांसद राजीव प्रताप रूढी ने कहा, विपक्ष की भूमिका प्रशांत किशोर ने निभाई लेकिन चुनाव के समय वे बाहर हो गए.
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नई दिल्ली:

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के प्रचार अभियान आज थम गया. पहले चरण में बंपर वोटिंग के बाद अब दूसरे चरण के मतदान और नतीजों का इंतजार है. बिहार के नतीजे 14 नवंबर को आएगा. इस बीच बिहार विधानसभा चुनाव की ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग कर दिल्ली पहुंची NDTV की टीम ने बिहार को जानने-समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार और चुनाव विश्लेषकों के साथ मंथन किया. NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने इस प्रोग्राम में अलग-अलग पत्रकारों और एक्सपर्ट से बिहार के चुनाव का विश्लेषण किया. इसमें वोटिंग प्रतिशत बढ़ने के साथ-साथ प्रशांत किशोर के असर पर भी बात हुई.

यशवंत देशमुख बोले- पीके एक साल से बिहार के लिए एक्स फैक्टर थे

इस कार्यक्रम में शामिल हुए इलेक्शन रिसर्च का काम करने वाली C-Voter के फाउंटर यशवंत देशमुख ने प्रशांत किशोर को लेकर कहा कि बीते एक साल से प्रशांत किशोर एक्स फैक्टर थे. वोट उन्हें मिल रहे हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. क्योंकि जन सुराज नई पार्टी है.

राजीव प्रताप रूडी बोले- विपक्ष का असल काम पीके ने किया, लेकिन...

BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी ने प्रशांत किशोर के असर को माना. उन्होंने कहा कि बीते एक साल से बिहार में आरजेडी और कांग्रेस को विपक्ष की भूमिका होना चाहिए था. लेकिन विपक्ष का असल काम प्रशांत किशोर कर रहे थे. लेकिन जब चुनाव का समय आया तो वो चुनाव से बाहर चले गए. परिणाम यह हुआ कि चुपचाप एनडीए के पक्ष में माहौल बना. अब प्रो इनकमबेंसी है. नीतीश कुमार के ऊपर लोगों ने बड़ा भरोसा जताया है. छपरा में इस बार हमलोग 10 में 8 सीटें जीतेंगे. एनडीए को भारी बहुमत मिलने वाली है.

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यदि पीके खुद को ब्राह्मण बता कर उतरते तो उन्हें फायदा होता...

राजीव प्रताप रूडी ने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर यदि अपने आप को ब्राह्मण बताते हुए चुनावी मैदान में उतरते तो उन्हें ज्यादा फायदा होता. भाजपा नेता ने साफ माना कि बिहार की राजनीति में जाति का बड़ा योगदान है. उन्होंने खुद के बारे में भी कहा कि वो पहले भाजपा नेता थे, लेकिन अब उन्होंने खुद को पहले राजपूत बना लिया है.

पीके का फैक्टर, बिहार में कितना असर?

बिहार चुनाव में सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर का जबरदस्त असर दिखा है. उनकी सभाओं में भीड़ भी जुटी है. लेकिन ग्राउंड जीरो पर काम कर रहे एक्सपर्ट का कहना है कि सोशल मीडिया पर जैसा पीके का असर दिख रहा है, वैसा ग्राउंड जीरो पर नहीं है.

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बिहार चुनाव के पुराने आंकड़ों के आधार पर यह डाटा तैयार किया गया है.

बिहार में 1957 से अब तक हुए चुनावों के आंकड़े देखने के बाद एक अनुमान लगाएं तो अगर जनसुराज जैसी नई पार्टी को 0-7%  मिले तो उन्हें 0-5 सीटें मिल सकती हैं. अगर 14% तक वोट मिले तो 5-20 सीटें मिल सकती हैं. अगर 14-17% वोट मिले तो 21-40 सीटें मिल सकती हैं. अगर 18% से ज्यादा वोट मिले तो जनसुराज निर्णाय भूमिका में आ सकती है.

प्रशांत किशोर को कितना सीटें आ सकती है

वोट शेयरसंभावित सीट
0-7 प्रतिशत0-5
7-14 प्रतिशत5-20
14-17 प्रतिशत21-40
18 प्रतिशत+निर्णायक कामयाबी


सतीश सिंह बोले- बिहार में प्रशांत किशोर का असर जरूर पड़ेगा

सतीश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में प्रशांत किशोर का असर जरूर पड़ेगा. पीके की पार्टी के कारण कई सीटों पर एनडीए का समीकरण भी बिगड़ सकता है. मालूम हो कि भारत में फर्स्ट पास द पोल सिस्टम है. इस सिस्टम के अनुसार यदि पीके को 18 फीसदी से अधिक मत मिलता है तो जन सुराज बिहार में निर्णायक भूमिका में होगी. 

प्रशांत किशोर की पार्टी का पिछला प्रदर्शन, पिछले साल हुए उपचुनाव में देखने को मिलता है.

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