- सारण जिले के सोनपुर में 4200 एकड़ क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण प्रस्तावित है.
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 1302 करोड़ रुपये की जमीन अधिग्रहण राशि को मंजूरी दी है.
- यह एयरपोर्ट पटना से लगभग 15 किलोमीटर दूर हाजीपुर और डुमरिया के बीच दरियापुर चंवर क्षेत्र में बनेगा.
बिहार के सारण के सोनपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने जा रहा है और इसे छपरा-सोनपुर क्षेत्र के इतिहास का सबसे बड़ा विकास निर्णय माना जा रहा है. CM नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई. 4200 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर 1302 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. सरकार ने इस हवाई अड्डे को वर्ष 2030 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा है.
यह एयरपोर्ट हाजीपुर और डुमरिया के बीच दरियापुर चंवर क्षेत्र में बनेगा. इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि यह पटना से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और उत्तर बिहार के बड़े हिस्से को सीधा हवाई संपर्क देगा. प्रस्तावित एयरपोर्ट का रनवे इतना आधुनिक और लंबा होगा कि यहां दुनिया के सबसे बड़े यात्री विमानों में शामिल एयरबस ए-380 जैसे विमान भी उतर सकेंगे. इससे साफ है कि यह परियोजना सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है.
परियोजना के पीछे राजीव प्रताप रूडी की भूमिका को सबसे अहम
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे छपरा से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी की भूमिका को सबसे अहम माना जा रहा है. पिछले सात वर्षों से वे इस एयरपोर्ट को लेकर लगातार प्रयास कर रहे थे. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके रूडी ने समय रहते यह समझ लिया था कि पटना एयरपोर्ट भविष्य की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा और बिहार को एक बड़े, आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की जरूरत है. सोनपुर को लेकर उनकी सोच आज जमीन पर उतरती दिख रही है.
बजट में सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मंजूरी
रूडी ने इस परियोजना को सिर्फ अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे पूरे बिहार के विकास से जोड़कर देखा. केंद्रीय बजट में सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद बिहार सरकार ने तेजी से आगे की प्रक्रिया शुरू की और अब कैबिनेट से भी इसकी स्वीकृति मिल गई है. यह सात साल की लगातार मेहनत और धैर्य का नतीजा है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस फैसले को मंजूरी देकर यह संकेत दिया है कि बिहार अब बड़े और दूरगामी विकास कार्यों के लिए तैयार है. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार ने प्रशासनिक स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. लेकिन राजनीतिक स्तर पर इस योजना को लगातार आगे बढ़ाने का श्रेय राजीव प्रताप रूडी को जाता है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह एयरपोर्ट छपरा और सोनपुर क्षेत्र को कैसे बदलेगा. सबसे पहले इसका असर रोजगार पर पड़ेगा. एयरपोर्ट के निर्माण और बाद के संचालन में हजारों लोगों को काम मिलेगा. स्थानीय युवाओं को अपने ही इलाके में रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन में कमी आएगी. सोनपुर, जो अभी तक रेलवे जंक्शन और सोनपुर मेले के लिए जाना जाता था, अब आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन सकता है. एयरपोर्ट के आसपास होटल, ट्रांसपोर्ट, गोदाम, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड स्टोरेज और छोटे उद्योग तेजी से विकसित होंगे. जमीन की कीमतें बढ़ेंगी और निजी निवेशकों की दिलचस्पी इस पूरे इलाके में बढ़ेगी.
पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आएगा
छपरा शहर को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा. व्यापारियों को नए बाजार मिलेंगे, किसानों को अपनी उपज देश और विदेश तक भेजने का मौका मिलेगा और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आएगा. सोनपुर मेला, गंगा-गंडक संगम, वैशाली और आसपास के ऐतिहासिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आसानी से पहुंच योग्य हो जाएंगे.
यह एयरपोर्ट केवल सारण जिले तक सीमित नहीं रहेगा. उत्तर बिहार, नेपाल, भूटान और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी यह एक बड़ा हवाई केंद्र बनेगा. करीब 80 वर्षों की आजादी के बाद इस स्तर का हवाई ढांचा मिलना इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है. कुल मिलाकर, सोनपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा छपरा-सोनपुर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पहचान और भविष्य तीनों को बदलने वाला है.













