बिहार के 6 जिलों में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए ली जा रही जमीन, पटना से पूर्णिया का सफर सिर्फ 3 घंटे में होगा पूरा

बिहार में 247-282 किमी लंबा 6 लेन का एक्सप्रेस वे वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया से होकर गुजरेगा.

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बिहार में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से सड़क निर्माण हो रहा है (NH31 की 2025 की तस्वीर)
ANI
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  • बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 2028 तक पूरा होगा
  • यह 6 जिलों से होकर गुजरेगा और 247 से 282 किलोमीटर लंबा होगा
  • इस एक्सप्रेसवे से कोसी-सीमांचल क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा और पूर्वोत्तर भारत से संपर्क बेहतर होगा

बिहार के पहले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NE-9) को केंद्र सरकार ने वित्तीय मंजूरी प्रदान कर दी है और इस प्रकार इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है. खास बात यह है कि इसका निर्माण हइब्रीड एन्यूटी मॉडल पर आधारित होगा. अनुमानित लागत के अनुसार 6 लेन के इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में 21 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च होगी और इसके तहत 247-282 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होगा. देश का यह अकेला एक्सप्रेसवे होगा जिसका निर्माण पूरी तरह बिहार की सीमा के अंदर होगा. यह सड़क हाजीपुर से आरंभ होकर पूर्णिया में समाप्त होगी और इसके वर्ष 2028 तक पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है. लिहाजा निर्माण के लिए भूमि-अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे और पूर्णिया से पटना की दूरी महज 3 घंटे से कम समय में पूरी की जा सकेगी. 

6 जिले, 282 किमी लंबाई, 21 हजार करोड़ से अधिक की आएगी लागत

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की शुरुआत वैशाली जिला के मीरनगर, हाजीपुर से आरंभ होगी और इसका समापन पूर्णिया जिला के डगरुआ प्रखण्ड के बरसौनी में होगा. मतलब इसका समापन ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर एनएच-27 पर होगा. इसकी लंबाई 247-282 किमी हो सकती है.यह सड़क राज्य के कुल 06 जिलों वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया से होकर गुजरेगी. यह 6 लेन सड़क होगी जिसपर 21 हजार करोड़ से 24 हजार करोड़ तक की लागत आने की संभावना है. यह एक्सप्रेसवे कोसी-सीमांचल के तीन जिले से होकर गुजरेगी जिसमें पूर्णिया में इसकी सबसे अधिक लंबाई 60 किमी होगी.

Photo Credit: NDTV

हाइब्रिड-एन्यूटी मॉडल(HAM)पर होगा एक्सप्रेस वे का निर्माण

नेशनल एक्सप्रेसवे -9 का निर्माण हाईब्रिड-एन्यूटी मॉडल पर आधारित होगा. यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)मॉडल है. इसके तहत सरकार और निर्माण एजेंसी निर्माण की कुल लागत और जोखिम को आपस मे 40:60 के अनुपात में साझा करते हैं. मतलब इस एक्सप्रेस वे के निर्माण में केंद्र सरकार 40 फीसदी और निर्माण एजेंसी 60 फीसदी राशि खर्च करेगी. नियम के तहत, परियोजना पूरी होने के बाद केंद्र सरकार निर्माण एजेंसी की लागत-राशि का भुगतान किश्तों में ब्याज के साथ करेगी.विकल्प के रूप में निर्माण एजेंसी लागत राशि टोल-टैक्स के जरिए भी वसूल सकती है.

तीन चरणों मे पूरा होगा एक्सप्रेसवे का निर्माण

एक्सप्रेसवे का निर्माण तीन चरणों में संपन्न होगा और इसकी मियाद वर्ष 2028 तक तय की गई है. पहले चरण में हाजीपुर से समस्तीपुर तक निर्माण होगा जिसकी अनुमानित लंबाई 86.5किमी और अनुमानित लागत 7000 करोड़ से अधिक होगा.

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दूसरे चरण में समस्तीपुर से सहरसा तक 53.2किमी सड़क का निर्माण होगा जिसमें अनुमानित लागत 5800 करोड़ रुपये है. इस चरण में कोसी नदी पर कुल 07 पुलों का भी निर्माण होना है.

तीसरे चरण में सहरसा से पूर्णिया तक 108 किमी सड़क का निर्माण होगा जिसकी अनुमानित लागत 9300 करोड़ होगी. इस सड़क में 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल,11 रेलवे ओवरब्रिज,322 अंडर पास का निर्माण होगा. जिला मुख्यालयों को जोड़ने के लिए अलग से लिंक रोड का निर्माण होगा.

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इस एक्सप्रेसवे को निर्बाध और द्रुतगति के लिए तैयार किया जाएगा और इसके लिए इसके एलाइनमेंट को शहरी इलाके से हटकर निकाला गया है.बहरहाल पूर्णिया से पटना की दूरी जो एनएच के रास्ते 06 घंटे में पूरी होती है वह केवल तीन घंटे में इस सड़क के रास्ते पूरी हो सकेगी.

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जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई आरंभ

एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद आरम्भ हो गई है. निर्माण के लिए अलाइनमेंट वर्ष 2025 में ही पूरा हो चुका है और अब भूमि-अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ हो रही है. इसके निर्माण के लिए 6 जिलों के 29 प्रखण्ड के 250 से अधिक गांवों में भूमि-अधिग्रहण किया जाना है.

पूर्णिया जिला के बीकोठी,धमदाहा,केनगर,कसबा, पूर्णिया पूर्व और डगरुआ प्रखण्ड में लगभग 544 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी रंजीत कुमार के अनुसार 'प्लॉट वेरिफिकेशन का आदेश दिया गया है.इसके बाद अधिगृहित की जाने वाली भूमि का गजट होगा.उसके बाद अन्य प्रक्रिया पूरी की जाएगी'.

निर्माण आरंभ होने से पहले विवादों में घिरा अलाइनमेंट

बीते सप्ताह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के एलाइनमेंट को लेकर विवाद पैदा हो गया. समस्तीपुर के सरायरंजन प्रखण्ड में स्थानीय लोगों ने एक कद्दावर राजनेता के प्रभाव में आकर एलाइनमेंट में बदलाव का आरोप लगाया. उनका कहना था कि इस बदलाव से 150 से अधिक आवासीय परिसर और संत रामाश्रय कॉलेज के अस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएगा जहां हजारों बच्चे पढ़ाई करते हैं.

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हालांकि इस विवाद के बाद पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बयान जारी कर इसका खंडन किया और कहा कि 'पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में कोई बदलाव या विचलन नही किया गया है. भूमि-अधिग्रहण की वर्तमान में जारी पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से मूलरूप से स्वीकृत एलाइनमेंट के अनुसार हीं संचालित की जा रही है '.

कोसी-सीमांचल के आर्थिक-परिदृश्य को मिल सकता है नया आयाम

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जिन छह जिलों से गुजरेगा उनमें से तीन जिला सहरसा,मधेपुरा और पूर्णिया बाढ़ प्रभावित इलाका रहा है और सड़क-सुविधा के मामले में हमेशा से पिछड़ा रहा है. इस इलाके से पटना की यात्रा पूर्व में जर्जर सड़कों पर  10-12 घंटे में पूरी होती थी जो अभी 6-7 घंटे में पूरी होती है.

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यह इलाका नेपाल और पश्चिम बंगाल से सटा हुआ है जिसका सामरिक महत्व है. वहीं यह इलाका मक्का और मखाना उत्पादन का बड़ा हब बनकर सामने आया है. पूर्णिया में एयरपोर्ट के निर्माण के बाद यहां उद्योग ,व्यापार और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ी है.

जाहिर है कि जब एक्सप्रेस वे का निर्माण होगा तो आर्थिक गतिविधियों में भी इजाफा होगा क्योंकि यह एक्सप्रेसवे पूर्वोत्तर भारत जाने के लिए तेज और सुगम कॉरिडोर भी साबित होगा. कुल मिलाकर यह सड़क भविष्य में विकास की धमनी भी साबित हो सकती है.

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