Bihar Politics: 'सरकार चाहती तो पर्दा डाल सकती थी, लेकिन...', NTA विवाद पर SC की सख्ती के बीच JDU सांसद का बड़ा बयान

NTA परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब सियासत भी तेज हो गई है. विपक्ष के हमलों के बीच एनडीए की अहम सहयोगी जेडीयू ने केंद्र सरकार का मजबूती से बचाव किया है.

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NTA विवाद: विपक्ष के हमलों के बीच सरकार के बचाव में उतरी JDU; संजय झा बोले- 'तुरंत परीक्षा रद्द कर पेश की ईमानदारी की मिसाल'
IANS

Patna News: देशभर में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उस पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्ष के लगातार हमलों के बीच अब केंद्र सरकार के बचाव में एनडीए (NDA) की अहम सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ढाल बनकर खड़ी हो गई है. शनिवार को पटना में जेडीयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा (Sanjay Kumar Jha) ने इस पूरे विवाद पर पार्टी का आधिकारिक रुख साफ किया. उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण तो माना, लेकिन सरकार की नीयत पर उठ रहे सवालों को सिरे से खारिज कर दिया.

'22 लाख बच्चों का दर्द हम समझते हैं'

संजय झा ने सबसे पहले उन लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, जो इस परीक्षा विवाद के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. जेडीयू सांसद ने कहा, 'यह पूरी घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. 22 लाख बच्चे, उनके माता-पिता और जो लोग दिन-रात मेहनत करके परीक्षा देते हैं, उनके लिए यह स्थिति बहुत दुखद है.' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिवार के लिए इतनी तैयारी के बाद ऐसा झटका लगना बिल्कुल भी सही नहीं है और जेडीयू छात्रों की इस पीड़ा को पूरी तरह समझती है.

'सरकार ने कुछ नहीं छिपाया, तुरंत लिया एक्शन'

छात्रों के प्रति सहानुभूति जताने के बाद, संजय झा ने इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जमकर पैरवी की. उन्होंने कहा कि जैसे ही इस पेपर लीक या अन्य गड़बड़ियों की जानकारी सरकार के संज्ञान में आई, उसने बिना किसी देरी के तुरंत पूरी परीक्षा रद्द करने का कदम उठाया. झा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए जोर देकर कहा कि इस मामले में सरकार ने कुछ भी छिपाने या उस पर पर्दा डालने की कोई कोशिश नहीं की है.

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'पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रद्द हुई परीक्षा'

जेडीयू नेता ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को छात्रों के हित में बताया. उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहती तो मामले को दबा सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. झा के मुताबिक, 'सरकार ने परीक्षा इसलिए रद्द की ताकि सिस्टम में पूरी तरह पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी एक मेधावी बच्चे के साथ कोई नाइंसाफी न हो. अब एग्जाम दोबारा करने के लिए बड़े स्तर पर मंथन चल रहा है.' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं और विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को घेरने में जुटा है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

बताते चलें कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर उठे विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई थी. इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट कहा कि केवल संस्थागत नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, ताकि यह पता चले कि कौन अधिकारी किस काम के लिए जिम्मेदार है. अदालत ने NTA को यूपीएससी जैसी संस्थाओं से सीख लेने की सलाह देते हुए कहा कि छात्रों और उनके परिवारों के सालों के संघर्ष और सपनों के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह NTA को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर जुलाई तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे.

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