पूर्णिमा के लिए गोविंदपुर सीट पर अग्नि परीक्षा, सास ससुर और पति की सियासी विरासत बचाएगी? या फिर गवाएंगी?

बिहार के नवादा जिले का गोविंदपुर सीट सबसे हॉट सीट बना हुआ है. ऐसा इसलिए कि इस सीट पर नवादा के पूर्व विधायक कौशल यादव परिवार का लंबे समय तक कब्जा रहा है. लेकिन 2020 के चुनाव में कौशल परिवार इस सीट से बेदखल हो गया.

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  • गोविंदपुर से पूर्णिमा यादव RJD प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं, जो परिवार की पुनर्वापसी का प्रयास है
  • 2020 के चुनाव में पूर्णिमा यादव जदयू से लड़ी थीं और राजद के मो. कामरान से तीस हजार से अधिक मतों से हार गई थीं
  • गोविंदपुर सीट पर राजद के मौजूदा MLA मो. कामरान निर्दलीय उम्मीदवार बन मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और कठिन हुआ
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बिहार के नवादा जिले का गोविंदपुर सीट सबसे हॉट सीट बना हुआ है. ऐसा इसलिए कि इस सीट पर नवादा के पूर्व विधायक कौशल यादव परिवार का लंबे समय तक कब्जा रहा है. लेकिन 2020 के चुनाव में कौशल परिवार इस सीट से बेदखल हो गया. 2025 में गोविंदपुर सीट पर पुनर्वापसी के लिए कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव फिर से चुनावी मैदान में हैं.

सबसे अहम कि 2020 के चुनाव में पूर्णिमा यादव जदयू से चुनाव लड़ी थी. तब राजद के मो. कामरान से 33 हजार मतों के अंतर से पराजित हो गई थी. लेकिन 2025 में पूर्णिमा यादव राजद से उम्मीदवार हैं. जबकि राजद के निवर्तमान विधायक मो कामरान निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं. दूसरी तरफ, एनडीए से एलजेपी (आर) से बिनीता मेहता उम्मीदवार हैं. बिनीता के पति बीजेपी के जिलाध्यक्ष अनिल मेहता की पत्नी हैं.

देखें तो, गोविंदपुर विधानसभा में मुकाबला काफी संघर्षपूर्ण हो गया है. ऐसे में पूर्णिमा यादव के लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी है कि वह अपने परिवार की सियासी विरासत को फिर से वापस लाने में कामयाब होती है या फिर उन्हें निराशा हाथ लगती है. चूकिं इस सीट से सिर्फ पूर्णिमा यादव की प्रतिष्ठा नहीं जुड़ी है. पूर्णिमा के सास, ससुर और पति भी गोविंदपुर से निर्वाचित होते रहे हैं. ऐसे में पूर्णिमा के समक्ष बड़ी चुनौती है.

तीसरी दफा बेदखल हुए हैं पूर्णिमा परिवार

देखें तो, गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र में 1967 से अबतक 15 चुनाव हुए हैं. लेकिन इसमें एक दफा पूर्णिमा यादव के ससुर, पांच दफा सास और तीन दफा पति और एक दफा खुद पूर्णिमा निर्वाचित हुई हैं. 2020 में तीसरा अवसर रहा है जब पूर्णिमा का परिवार गोविंदपुर की सता से बेदखल हुआ.

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पहली दफा 1977 में पूर्णिमा यादव की सास गायत्री देवी सता से बेदखल हुई थी. जब जनता पार्टी के भतु महतो की जीत हुई थी. बता दें कि गायत्री देवी पहली दफा 1970 में निर्वाचित हुई थी. 1972 में नवादा से निर्वाचित हुई थी.

लेकिन 1980 में पूर्णिमा यादव की सास गायत्री देवी फिर से गोविंदपुर सीट पर काबिज हुई थी. इसके बाद वह लगातार 1990 तक जीतती रहीं. लेकिन 1995 में पूर्णिमा यादव का परिवार दूसरी दफा सता से बेदखल हुई थी तब जनता दल के प्रो केबी प्रसाद निर्वाचित हुए थे. लेकिन 2000 में गायत्री देवी फिर से काबिज हो गई थी. इसके बाद फरवरी 2005, अक्टूबर 2005 और 2010 में पूर्णिमा के पति कौशल यादव निर्वाचित हुए थे. जबकि 2015 में पूर्णिमा यादव खुद निर्वाचित हुई थी. 2020 के चुनाव में तीसरी दफा पूर्णिमा यादव का परिवार सत्ता से बेदखल हुईं. तब पूर्णिमा यादव 33 हजार मतों के अंतर से पराजित हो गई थी.

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पुनर्वापसी के लिए राजद की शरण में पूर्णिमा

पूर्णिमा यादव अपनी पुनर्वापसी के लिए राजद के शरण में गई हैं. लेकिन पूर्णिमा के मुकाबला में एक तरफ राजद के निवर्तमान विधायक मो. कामरान हैं, जो निर्दलीय मैदान में हैं, जबकि दूसरी तरफ बीजेपी जिलाध्यक्ष अनिल मेहता की पत्नी बिनीता मेहता हैं, जिनके लिए एनडीए का पूरा खेमा जुटा है.

मजबूत रहा है पूर्णिमा का सियासी विरासत

दरअसल, पूर्णिमा के परिवार की सियासत काफी मजबूत रही है. सबसे पहले 1969 में पूर्णिमा यादव के ससुर युगल किशोर सिंह यादव निर्वाचित हुए थे. लेकिन उनके आकस्मिक निधन के बाद पूर्णिमा की सास गायत्री देवी चुनाव मैदान में आईं थी. इसके बाद से यह सिलसिला चल रहा है. पूर्णिमा परिवार का गोविंदपुर में 10 दफा जीत के अलावा नवादा सीट पर भी पांच दफा कब्जा रहा है. 1972 में गायत्री देवी निर्वाचित हुई थी. फिर फरवरी 2005, अक्टूबर 2005 और 2010 के चुनाव में पूर्णिमा यादव निर्वाचित हुई थी. जबकि 2019 के उपचुनाव में कौशल यादव निर्वाचित हुए थे. पूर्णिमा का परिवार कांग्रेस, निर्दलीय, जदयू और अब राजद से चुनाव लड़ते रहे हैं.

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