जीवन और अंतिम यात्रा साथ-साथ: 95 साल के पति के अंतिम विदाई की चल रही थी तैयारी, 90 साल की पत्नी ने भी दम तोड़ा

घटना उजियारपुर के परोरिया गांव की है. 95 वर्षीय बुजुर्ग किसान युगेश्वर राय लंबे समय से अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे थे. बीती रात उन्होंने अंतिम सांस ली. अविनाश कुमार की रिपोर्ट

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  • समस्तीपुर के उजियारपुर के परोरिया गांव के बुजुर्ग दंपती ने मौत के बाद भी साथ रहने का उदाहरण प्रस्तुत किया
  • 95 वर्षीय किसान युगेश्वर राय के निधन के तुरंत बाद उनकी 90 वर्षीय पत्नी तेतरी देवी ने भी दम तोड़ दिया
  • तेतरी देवी पति की मृत्यु के सदमे में बेसुध होकर अचानक प्राण त्याग गईं, जिससे गांव में शोक फैल गया
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कहते हैं 'जोड़े स्वर्ग में बनते हैं', लेकिन इस कहावत को हकीकत में चरितार्थ किया है समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड स्थित परोरिया गांव के एक बुजुर्ग दंपती ने. वर्षों तक सुख-दुख में एक-दूसरे का हाथ थामे रखने वाले इस जोड़े ने मौत के बाद भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा. पति के निधन के कुछ ही समय बाद पत्नी ने भी दम तोड़ दिया, जिससे पूरे इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है.

एक ही रात में सूना हुआ घर
घटना उजियारपुर के परोरिया गांव की है. 95 वर्षीय बुजुर्ग किसान युगेश्वर राय लंबे समय से अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रहे थे. बीती रात उन्होंने अंतिम सांस ली. घर में कोहराम मच गया और परिजन उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे थे, तभी कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. 

पति का विछोह नहीं सह सकीं 90 वर्षीय तेतरी देवी
अपने जीवनसाथी के पार्थिव शरीर के पास बैठी 90 वर्षीय तेतरी देवी का रो-रोकर बुरा हाल था. पति की मृत्यु के सदमे में वह अचानक बेसुध होकर चीखने लगीं और देखते ही देखते उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए. गांव वालों का कहना है कि यह शायद उनके अटूट प्रेम का ही असर था कि वे एक पल भी अपने पति से अलग नहीं रहना चाहती थीं.  

गांव में गमगीन माहौल, अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़
जैसे ही यह खबर फैली कि दंपती ने एक साथ दुनिया को अलविदा कह दिया है, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. लोग इस मार्मिक संयोग को देख अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए. दंपती अपने पीछे तीन बेटे और दो विवाहित बेटियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. ग्रामीणों के अनुसार, युगेश्वर राय और तेतरी देवी का जीवन हमेशा प्रेम और समर्पण का उदाहरण रहा है.

"साथ जिए, साथ मरे"
परोरिया गांव में आज हर जुबान पर बस एक ही चर्चा है-  'साथ जीने और साथ मरने' के वादे की. जिस घर से एक साथ दो अर्थियां उठीं, वहां का दृश्य देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया. इस घटना ने साबित कर दिया कि आज के दौर में भी निस्वार्थ प्रेम की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं.

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