तो क्या अपनी मां को राज्यसभा भेजना चाहते हैं चिराग पासवान? जानें- पार्टी में इसे लेकर क्या चर्चा, अप्रैल में खाली हो रहीं बिहार की 5 सीटें

सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान का मानना है कि राज्यसभा सीट की मांग करने के बजाय पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों को बिहार सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियों में समायोजित करना ज्यादा अहम है. इससे संगठन को मजबूत किया जा सकेगा और उसके विस्तार में मदद मिलेगी. एक सूत्र ने तो यह भी बताया कि रीना पासवान स्वयं भी इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं.

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लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने संकेत दिया है कि बिहार में अप्रैल में खाली हो रही पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव में पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान के लिए कोई दावा नहीं पेश करेंगे. पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर चल रही चर्चा का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है.

लंबे वक्त से लग रहे थे कयास

चिराग पासवान के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन 2020 में हुआ था. उनके बाद से लगातार ऐसी अटकलबाज़ियां लगती रही हैं कि चिराग अपनी मां को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, पार्टी के शीर्ष स्तर के सूत्रों का कहना है कि न तो पार्टी ने कभी इस तरह की मांग की, न ही इस दिशा में कोई दबाव बनाया गया.

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मार्च में होंगे चुनाव

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर जो बातचीत हुई थी, उसमें भी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने किसी राज्यसभा सीट की मांग नहीं रखी थी. संभावना है कि बिहार की पांच सीटों के लिए मार्च में चुनाव होंगे.

सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान का मानना है कि राज्यसभा सीट की मांग करने के बजाय पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों को बिहार सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियों में समायोजित करना ज्यादा अहम है. इससे संगठन को मजबूत किया जा सकेगा और उसके विस्तार में मदद मिलेगी. एक सूत्र ने तो यह भी बताया कि रीना पासवान स्वयं भी इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं.

इन नेताओं का कार्यकाल हो रहा खत्म

अप्रैल में जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता और ए. डी. सिंह, जेडीयू के हरिवंश और रामनाथ ठाकुर, तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं.इन सीटों के लिए मार्च में चुनाव होने की संभावना है.

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राज्यसभा में एक सीट पर हो सकता है कड़ा मुकाबला

पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली मजबूत सफलता को देखते हुए अनुमान है कि पांच में से कम से कम चार सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है.
 

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