बिहार में पिछले कुछ दिनों से पुलिसकर्मियों के लिए ड्यूटी के दौरान वर्दी और पहनावे से जुड़े एक निर्देश को लेकर हंगामा मचा है. बिहार के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर बवाल के बाद अब पुलिस मुख्यालय ने स्पष्टीकरण जारी कर दिया है. दरअसल पिछले शनिवार को बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने सख्त लहजे में पुलिसकर्मियों से कहा था कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी अपनी वर्दी के साथ माथे पर तिलक या चंदन का टीका जैसे किसी भी तरह के धार्मिक चिह्न का उपयोग नहीं कर सकते. डीजीपी के इस निर्देश के बाद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे तुष्टिकरण वाला फैसला तक बता दिया. इसके बाद अब पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है.
बिहार के पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि डीजीपी ने जो निर्देश दिए थे वे कोई नए दिशा निर्देश नहीं हैं. पुलिस मुख्यालय की तरफ से जारी स्पष्टीकरण में बताया गया है कि बिहार पुलिस हैंडबुक 1978 के नियम 1061 में यह प्रावधान किए गए हैं. बयान में कहा गया है कि यह सारे नियम पहले से लागू हैं, और कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है.
किन बातों की है मनाही?
बिहार पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि पुलिस हैंडबुक के नियमों के तहत पहनावे को लेकर निम्नलिखित पाबंदियां हैं -
- नियमों के मुताबिक कोई भी जाति चिह्न या लेप लगाने की अनुमति नहीं है
- कोई भी पुलिसकर्मी बिना वर्दी के ड्यूटी पर नहीं जा सकता
- वर्दी पहन कर सिगरेट नहीं पी सकते, न ही पान खा सकते हैं
- गोपनीय शाखा के कर्मी बिना आदेश के वर्दी पहन कर बाहर नहीं जा सकते
- ट्रैफिक कंट्रोल में लगे पुलिसकर्मी छाता नहीं रख सकते
- अगर कोई पुलिसकर्मी कोई आभूषण पहनते हैं तो वह वर्दी के बाहर दिखाई नहीं देना चाहिए
क्या कहा था डीजीपी ने?
डीजीपी विनय कुमार ने पिछले सप्ताह सख्त लहजे में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के वर्दी के साथ माथे पर तिलक या चंदन का टीका जैसे किसी भी तरह के धार्मिक चिह्नों के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए थए. उन्होंने इसे पुलिस मैनुअल का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी थी कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. उनके इस निर्देश के बाद प्रदेश में इसे लेकर बहस छिड़ गई और राजनीतिक दलों से लेकर सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने सवाल उठाने शुरू कर दिए.
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बिहार के पुलिस महानिदेशक ने निर्देश जारी करते हुए चेतावनी भी दी थी
भाजपा नेताओं ने किया भारी विरोध
इस दिशा निर्देश का सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी विरोध किया था. भाजपा के पूर्व विधायक और धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य हरिभूषण ठाकुर बचौल ने इस फैसले को तुष्टिकरण का फैसला बताया था. उन्होंने कहा था,"अगर कोई तिलक लगा कर ड्यूटी में नहीं आएगा तो कोई बुर्का पहन कर या मूंछ हटाकर और दाढ़ी रख कर भी ड्यूटी में नहीं आए, यह लोकतंत्र का तकाजा है. उन्होंने कहा था कि सरकार को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए."
सोशल मीडिया पर उठाए गए सवाल
एक यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'क्या बिहार पुलिस की ईमानदारी तिलक से तय होती है? क्या भ्रष्टाचार चंदन लगाकर आता है? क्या अपराधी तिलक देखकर बच जाते हैं? अगर माथे का तिलक अनुशासन के खिलाफ है, तो वर्दी में जातिवाद, रिश्वतखोरी, राजनीतिक चाटुकारिता किस नियम के तहत वैध है?' एक दूसरे यूजर ने लिखा, 'व्यक्तिगत तौर पर तो यह सही बोल रहे हैं. लेकिन बिहार पुलिस विभाग में इसे लागू करना बहुत मुश्किल है.'
रील बनाने वालों पर पुलिस की सख्ती
इन दिनों बिहार पुलिस ने ड्यूटी की आचार संहिता पर सख्ती बरती है. पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान रील बनाता है तो उस पर भी कार्रवाई होगी. पुलिस मुख्यालय ने विभिन्न जिलों के वर्दी में रील बनानेवाले 50 पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन्हें निलंबित किया था.
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