BSEB Result: टीन का मकान... खुद किया मेडिकल स्टोर में काम, 12वीं में सूबे में आया दूसरा स्थान

लकी की सफलता इस मायने में बेहद ख़ास है क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचने में न केवल लकी को बल्कि पूरे परिवार को हर दिन संघर्ष करना पड़ा. लेकिन, लकी का पूरा परिवार उसके संघर्ष में हम कदम बना रहा.

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मो. लक्की

BSEB 12th Result: बिहार में 12वीं के बोर्ड का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. सोमवार (23 मार्च) दोपहर को बोर्ड ने रिजल्ट जारी किया. लेकिन बोर्ड के रिजल्ट में कुछ ऐसे परिणाम सामने आए हैं जो बताती है कि हौसले अगर बुलंद हो तो जीत तय है. ऐसा ही एक मामला बिहार के पूर्णिया जिले से आया है. जहां घड़ी रिपेयर करने वाले के बेटे ने बिहार इंटरमीडिएट की परीक्षा में आर्ट्स संकाय में सूबे में दूसरा स्थान हासिल की है. स्थानीय खजांची हाट निवासी और मो इम्तियाज के पुत्र जिला स्कूल के छात्र, मो लक्की अंसारी ने 478 अंक(95.60%) हासिल किया है.

लकी की सफलता इस मायने में बेहद ख़ास है क्योंकि इस मुकाम तक पहुंचने में न केवल लकी को बल्कि पूरे परिवार को हर दिन संघर्ष करना पड़ा. लेकिन, लकी का पूरा परिवार उसके संघर्ष में हम कदम बना रहा. पिता मो इम्तियाज कहते हैं कि 'बहुत खुशी मिल रही है, बहुत मेहनत कर पढ़ाए-लिखाए, आगे चलकर कामयाब बने'.

टीन का घर और खुद की मेडिकल स्टोर में नौकरी

मो लकी का घर टीन का है और माता-पिता और तीन भाई बहनों के लिए महज एक कमरा उपलब्ध है. परिवार की गुरबत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बारिश में लकी के टीन के छप्पड़ से बारिश की बूंदे टपकती रहती थी. पिता की घड़ी की मरम्मत करते हैं जिससे दो वक्त की रोटी भी बमुश्किल मयस्सर हो पाती है. एक दौर ऐसा भी आया जब लकी अंसारी को ट्यूशन के पैसे कम पड़ने लगे तो करीब छह माह तक एक मेडिकल स्टोर में भी नौकरी किया. तब बड़े भाई ने मोर्चा संभाला और खुद प्राइवेट नौकरी कर लकी की हौसला अफ़जाई की.

पूरी परिवार के साथ मो लक्की

यूट्यूब को बनाया हथियार.. टॉपर नहीं बनने का मलाल

लकी अपनी सफलता का श्रेय पूरे परिवार को देते हुए बताता है कि वह ऑफलाइन कोचिंग के अलावा 6 से 7 घण्टे हर रोज सेल्फ स्टडी का सहारा लिया. इस क्रम में उसने यूट्यूब को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. लकी अंसारी कहते हैं कि 'टॉपर बनने से इज्जत मिलती है और माता-पिता को खुशी मिलती है. लेकिन, लकी को इस बात का मलाल है कि वह केवल एक नंबर की वजह से बिहार टॉपर बनने से वंचित रह गए.

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लकी के पिता मो इम्तियाज बताते हैं कि बेटे को पूरा भरोसा था कि वह टॉपरों की सूची में रहेगा. पिता ने जब यह बात अपने मित्रों से बताई तो एक मित्र ने तंज कसते हुए कहा था कि 'आशियाना झोपड़ी में और ख्वाब शहंशाह जैसे'. पिता कहते हैं कि अभी घर में ईद का माहौल है और यह हमारे परिवार के लिए ईद का सबसे बड़ा तोहफा है. उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि उसकी पहचान बेटे की कामयाबी से हो.

लकी बनना चाहता है शिक्षक

अन्य टॉपरों से अलग मो. लकी अंसारी आईएएस और आईपीएस बनने की तमन्ना नहीं रखता है. वजह साफ है कि लकी के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह लम्बे समय तक पढ़ाई जारी रख सके. वह पहले शिक्षक बनना चाहता है ताकि घर की माली हालत को सुधारने में मदद कर सके. मां पम्मी अंसारी कहती हैं 'बेटा कहता है कि टीचर बनेंगे. घर का हालात ठीक होंगे तो फिर आगे देखा जाएगा'.

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