अति पिछड़ा वर्ग-महिलाओं पर फोकस, बीजेपी की 71 उम्मीदवारों की लिस्ट में 'सोशल इंजीनियरिंग' का रखा ख्याल

बीजेपी ने 71 उम्मीदवारों की पहली सूची में 'सामाजिक संतुलन' का पूरा ध्यान रखा है, खासकर अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं पर विशेष फोकस किया है. 

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पटना:

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने 71 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में पार्टी ने जहां अपने कई वरिष्ठ नेताओं पर भरोसा जताया है, वहीं चौंकाने वाले फैसले लेते हुए कुछ बड़े और कद्दावर चेहरों का टिकट काट दिया है. बीजेपी की इस लिस्ट को 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'जीत की क्षमता' के संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है.

बीजेपी ने 71 उम्मीदवारों की पहली सूची में 'सामाजिक संतुलन' का पूरा ध्यान रखा है, खासकर अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं पर विशेष फोकस किया है. 

अनुसूचित जाति (SC): 6

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 11

अति पिछड़ा जाति (EBC): 17

महिला उम्मीदवार: 9

अति पिछड़ा जाति पर फोकस: 71 में से 17 टिकट (लगभग 24%) अति पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को दिए गए हैं, जो दर्शाता है कि बीजेपी इस वर्ग को सबसे बड़े वोट बैंक के रूप में साधने की कोशिश कर रही है. बिहार की राजनीति में EBC वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता रहा है.

महिलाओं को प्रतिनिधित्व: 9 महिला उम्मीदवारों को टिकट देना, महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की पार्टी की रणनीति को पुष्ट करता है.

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SC समुदाय को प्रतिनिधित्व: 6 SC उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, जो आरक्षित सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश करने की रणनीति का हिस्सा है.

6 सिटिंग मंत्रियों पर विश्वास

जारी सूची में बीजेपी ने अपने 6 सिटिंग विधायकों/मंत्रियों को भी टिकट दिया है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी ने उन क्षेत्रों में कोई जोखिम नहीं लिया है, जहां उसका नेतृत्व मजबूत है.

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कुल मिलाकर, बीजेपी की यह पहली सूची बिहार चुनाव में पार्टी की आक्रामक रणनीति का खुलासा करती है. बड़े नेताओं का टिकट काटकर और पिछड़े व अति पिछड़े समुदायों को प्राथमिकता देकर बीजेपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका मुख्य लक्ष्य 'जातिगत समीकरण' और 'जीती हुई सीटों' के फॉर्मूले के साथ सत्ता में वापसी करना है.

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