बिहार की 32388 शिक्षक पदों की TRE-4 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी हो गया है. लेकिन इसके बाद भी छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर छात्रों का आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है. अब यह आंदोलन राजनीतिक रंग लेने लगा है. पेपर लीक, भर्ती में गड़बड़ी, सरकारी नौकरी और शिक्षा से जुड़े सवालों को लेकर पटना में छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है. अब इस आंदोलन में नेताओं की भी सीधी एंट्री हो गई है. पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव रविवार को छात्रों के बीच पहुंचे और उनके समर्थन में उपवास किया. इसके बाद मंगलवार को तेजस्वी यादव भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच पहुंचे. इससे छात्रों के मुद्दे पर शुरू हुआ आंदोलन अब बिहार की राजनीति का भी हिस्सा बनता दिख रहा है.
गर्दनीबाग में कई दिनों से छात्र कर रहे प्रदर्शन
पटना के गर्दनीबाग में छात्र और शिक्षक अभ्यर्थी कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मुख्य मांगों में बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करना, असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में UGC के नियम लागू करना और 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करना शामिल है. छात्रों का कहना है कि भर्ती और परीक्षा की पूरी प्रक्रिया साफ और सही होनी चाहिए. उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है.
पप्पू यादव ने भूख हड़ताल की कही थी बात
पप्पू यादव रविवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच पहुंचे. उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और कहा कि रोजगार का सवाल बिहार के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है. उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी कि अगर छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. पप्पू यादव ने बिहार बंद और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की बात भी कही. उनके इस कदम से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिला और यह मुद्दा और चर्चा में आ गया.
आंदोलनकारियों के मंच तक पहुंचे तेजस्वी, कहा- बिहार पेपर लीक की राजधानी
पप्पू यादव के बाद अब तेजस्वी यादव भी छात्रों के साथ खड़े दिखाई दिए. तेजस्वी ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि “बिहार अब पेपर लीक की राजधानी बन गया है.” उनका कहना है कि राज्य में परीक्षाएं सही तरीके से नहीं हो रही हैं. उन्होंने कहा कि समस्या केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल और कॉलेज की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल हैं.
19 अगस्त को राजभवन मार्च करेंगे तेजस्वी
तेजस्वी ने रोजगार के मुद्दे को भी आंदोलन से जोड़ दिया. उन्होंने सरकार के रोजगार के वादों पर सवाल उठाया. उनका आरोप है कि सरकार ने बड़ी संख्या में नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन उस हिसाब से काम नहीं हुआ. तेजस्वी ने छात्रों, नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं, कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों से 19 अगस्त को राजभवन मार्च में शामिल होने की अपील की है.
सीवान की घटना से विपक्ष को मिला मौका
सीवान की घटना ने भी इस आंदोलन को एक नया मुद्दा दे दिया है. छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने AK-47 से फायरिंग की थी. इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है. तेजस्वी यादव ने कहा है कि सिर्फ पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा. उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है. RJD अब इस घटना को पेपर लीक, भर्ती और बेरोजगारी के मुद्दे के साथ जोड़कर 19 अगस्त के राजभवन मार्च में उठाने की तैयारी में है.
पप्पू के बाद तेजस्वी भी छात्रों के समर्थन में उतरे
यहीं से छात्र आंदोलन में राजनीति साफ दिखाई देने लगी है. छात्रों की अपनी मांगें हैं, लेकिन राजनीतिक दल अब इन मांगों को सरकार के खिलाफ बड़े मुद्दे के रूप में पेश कर रहे हैं. पप्पू यादव ने छात्रों के बीच पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया. इसके बाद तेजस्वी यादव ने भी छात्रों के साथ खड़े होकर इस मुद्दे को RJD के बड़े राजनीतिक आंदोलन से जोड़ दिया है.
तेजस्वी के राजभवन मार्च का कैसा होगा असर?
RJD की कोशिश है कि पेपर लीक, नौकरी, भर्ती में गड़बड़ी, शिक्षा और सीवान की घटना जैसे अलग-अलग मुद्दों को एक साथ रखा जाए. पार्टी का कहना है कि बिहार का युवा परीक्षा और नौकरी की व्यवस्था से परेशान है और सरकार उसकी बात नहीं सुन रही है. 19 अगस्त का राजभवन मार्च इसी रणनीति का हिस्सा है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 19 अगस्त के मार्च में कितने छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी पहुंचते हैं. अगर बड़ी संख्या में छात्र इसमें शामिल होते हैं तो विपक्ष इसे युवाओं का बड़ा आंदोलन बता सकता है. लेकिन अगर इसमें राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा रहती है तो सरकार इसे विपक्ष का राजनीतिक कार्यक्रम बता सकती है.
सरकार के सामने चुनौती
सरकार के सामने भी बड़ी चुनौती है. उसे छात्रों की मांगों का जवाब देना होगा. पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों पर सरकार को साफ जवाब देना होगा. साथ ही यह भी बताना होगा कि युवाओं को नौकरी देने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है. सीवान की घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सरकार को सावधानी बरतनी होगी.
देखना होगा आंदोलन का स्वरूप क्या होगा?
बिहार में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं. इसलिए नौकरी, परीक्षा और पेपर लीक का मुद्दा आने वाले समय में भी बड़ा रह सकता है. फिलहाल छात्र आंदोलन के मंच पर राजनीतिक नेता पहुंच चुके हैं. पप्पू यादव ने छात्रों के बीच पहुंचकर समर्थन दिया है और तेजस्वी यादव ने इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलने की कोशिश शुरू कर दी है. अब देखना होगा कि 19 अगस्त का मार्च सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम रहता है या बिहार के छात्रों और युवाओं का बड़ा आंदोलन बनता है.
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