ये मां आज भी अपने दोनों बच्चों की तस्वीर देखते ही फफक पड़ती है

पटना के शास्त्रीनगर की वो गलियां, जहां कभी साक्षी और दीपक की किलकारियां गूंजती थीं, आज इस परिवार के लिए किसी बुरे सपने जैसी हैं. किरण देवी का गला रुंध जाता है. अविनाश कुमार की रिपोर्ट

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • किरण देवी के दो बच्चे साक्षी और दीपक की 15 अगस्त की शाम को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी
  • परिवार का आरोप है कि बच्चों की हत्या ट्यूशन टीचर ने की और शवों को कार में छिपाया गया था
  • पुलिस ने मामले को हादसा बताकर फाइल बंद करने की कोशिश की जबकि परिवार न्याय की उम्मीद में है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
पटना:

कहते हैं वक्त हर जख्म को भर देता है, लेकिन किरण देवी के लिए वक्त जैसे 15 अगस्त की उस काली शाम को ही ठहर गया. जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब एक मां की पूरी दुनिया उजड़ रही थी. आज पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन साक्षी (7 वर्ष) और दीपक (6 वर्ष) की तस्वीरें निहारते हुए किरण की आंखों से बहने वाला समंदर आज भी नहीं सूखा है.

"साहब, वो हादसा नहीं हत्या थी..."
पटना के शास्त्रीनगर की वो गलियां, जहां कभी साक्षी और दीपक की किलकारियां गूंजती थीं, आज इस परिवार के लिए किसी बुरे सपने जैसी हैं. किरण देवी का गला रुंध जाता है जब वह उस मंजर को याद करती हैं: “दोपहर 12 बजे बच्चे ट्यूशन गए थे. शाम को उनकी जली हुई लाशें एक कार से बरामद हुईं. उनके शरीर पर चोट के निशान थे, चमड़ी झुलसी हुई थी. कोई कैसे कह सकता है कि यह सिर्फ एक हादसा था?” 

किरण का सीधा आरोप है कि ट्यूशन टीचर ने ही मासूमों की जान ली और सबूत मिटाने के लिए उन्हें कार में छिपा दिया. लेकिन विडंबना देखिए, जिस सिस्टम को न्याय करना था, पीड़ित परिवार का आरोप है कि वही सिस्टम अब इसे 'हादसा' बताकर फाइल बंद करने की कोशिश में है.  

पटना का सपना टूटा, अब मजदूरी और बेबसी की जिंदगी
कभी आंखों में बच्चों को अफसर बनाने का सपना लिए यह दंपती पटना में हाड़-तोड़ मेहनत करता था. पति गणेश साह राजमिस्त्री का काम करते थे और किरण दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका कर पाई-पाई जोड़ती थीं. आज सब खत्म हो चुका है. न्याय तो दूर, हालात ऐसे बने कि परिवार को पटना छोड़ना पड़ा. 

आज किरण कभी समस्तीपुर के घटहो में अपने ससुराल तो कभी सरायरंजन में मायके में शरण ले रही हैं. अब बस 4 साल की छोटी बेटी रोहिणी ही उसके जीने का सहारा है, जिसे वह सीने से लगाए इंसाफ की राह देख रही है.

जब सड़क पर उतरा था जन-आक्रोश
आपको याद होगा, जब इन मासूमों के शव मिले थे, तो पटना की सड़कों पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था. अटल पथ पर गाड़ियां फूंक दी गई थीं, यहां तक कि मंत्री के काफिले पर भी पथराव हुआ था. पुलिस ने तब बड़े-बड़े वादे किए थे, सीसीटीवी फुटेज और जांच की बात कही थी. लेकिन आज वही पुलिसिया कार्रवाई ठंडे बस्ते में है.

Advertisement

इंसाफ की भीख नहीं, अपना हक मांग रही हूं
किरण की सिसकियां आज हमारे समाज और कानून-व्यवस्था से एक ही सवाल पूछ रही हैं-  क्या एक गरीब मां के बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं? क्या रसूख और फाइलों के नीचे मासूमों की चीखें दबा दी जाएंगी?

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Bharat Ki Baat Batata Hoon | Babri Masjid पर Yogi की सीधी चेतावनी! Humayun Kabir