बिहार में बीजेपी ने अपने उम्मीदवार किए घोषित, कुशवाहा ने खुद को बनाया उम्मीदवार, हो सकती है क्रॉस वोटिंग

बिहार के पांच सीटों के लिए होने वाला राज्यसभा चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है. ऐसा लग रहा है कि एनडीए पांचों सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी जबकि विपक्ष या महागठबंधन की तरफ से भी एक उम्मीदवार उतारा जाएगा और यदि पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार हो जाएं तो वोटिंग होगी.

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जदयू के नेता और नीतीश कुमार के करीबी श्रवण कुमार ने मीडिया को जानकारी दी है कि होली के बाद यानी 5 मार्च को नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जदयू के तरफ से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाएगा, इसके बाद जदयू के तरफ से कई नेता इसका स्वागत कर चुके हैं. जदयू की तरफ से दूसरे उम्मीदवार रामनाथ ठाकुर हो सकते हैं, जो अभी केंद्रीय मंत्री भी हैं.

निशांत कुमार के राज्यसभा में आने का कई राजनैतिक मतलब और संकेत हैं. सबसे पहला कि परिवारवाद वाली बात अब जदयू भी नहीं करेगी और लालू यादव पर परिवारवाद का तोहमत नहीं लगा सकती है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि नीतीश कुमार के स्वास्थ्य के बारे में लेकर जो सवाल पूछे जा रहे हैं वैसे में क्या निशांत अपने पिता को अकेले छोड़ना चाहेंगे, भले ही वह संसद सत्र के दौरान ही क्यों ना हो. बिहार में यह भी चर्चा थी कि निशांत कुमार को बिहार सरकार में अगली बड़ी ज़िम्मेदारी के लिए तैयार किया जा रहा है. यदि ऐसा है तो उन्हें विधानपरिषद में लाया जाना चाहिए था, न कि राज्यसभा में. बिहार में इस बात की भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के इर्द गिर्द जो एक लॉबी है, वह बाप बेटे को अलग करवाने में कामयाब रही है. 

बिहार में राज्यसभा चुनाव में होगी क्रॉस वोटिंग?

बिहार के पांच सीटों के लिए होने वाला राज्यसभा चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है. ऐसा लग रहा है कि एनडीए पांचों सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी जबकि विपक्ष या महागठबंधन की तरफ से भी एक उम्मीदवार उतारा जाएगा और यदि पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार हो जाएं तो वोटिंग होगी. एनडीए भी यही चाहती है कि क्योंकि आंकड़ों में एनडीए को बढ़त है. बिहार में एनडीए के पास 202 विधायक हैं और एक सीट के लिए चाहिए 41 वोट. इस लिहाज से एनडीए के चार उम्मीदवारों का तो तो जीतना तय है मगर उसके पास अब भी 38 अतिरिक्त वोट बचते हैं. यानि अपना पांचवा उम्मीदवार जितवाने के लिए उसे 3 अतिरिक्त वोट चाहिए. राज्यसभा चुनाव में सीक्रेट वोटिंग नहीं होती है, वोट डालने के पहले अपने वोट को विधायक अपने पार्टी के अधिकृत पदाधिकारी को दिखाता है कि उसने किस उम्मीदवार के नाम के आगे टिक किया है और वरीयता दी है.

बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन और शिवेश राम को अपना उम्मीदवार बनाया है. अब यदि उपेन्द्र कुशवाहा मैदान में आते हैं तो वोटिंग होगी और उन्हें जितवाने के लिए एनडीए को तीन विपक्षी विधायकों को क्रास वोटिंग करवानी पड़ेगी. यह कहा जा रहा है वो तीन विधायक कौन होंगे, उसकी व्यवस्था एनडीए ने कर ली है. ये विधायक कांग्रेस के हो सकते हैं, बीएसपी का भी एक विधायक है, आईआईपी पार्टी के आई पी गुप्ता पर भी बीजेपी की नजर होगी. एआईएमआईएम के भी पांच विधायक हैं. हालांकि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते कभी वोटिंग नहीं होने दिया है, वो क्रॉस वोटिंग के लिए हमेशा मना करते आए हैं. हां पिछली बार जब बिहार में राज्यसभा चुनाव में वोटिंग हुई थी तब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री थे. जदयू  की तरफ से जहां निशांत कुमार और रामनाथ ठाकुर से लेकर कई ऐसे नामों की चर्चा है, जो नीतीश के बहुत करीबी हैं. देखना होगा वो कौन से दो नाम हैं   जो फाइनल होंगे.


तेजस्वी के नाम की घोषणा नहीं,फिर से एडी सिंह ?

विपक्ष के खेमे से पहले ये खबर आई थी कि तेजस्वी यादव उम्मीदवार हो सकते हैं मगर अभी तक आरजेडी ने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है. यदि तेजस्वी राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ते हैं तो आरजेडी का उम्मीदवार एडी सिंह ही होंगे, जो अभी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं. बहुत बड़े उद्योगपति हैं और अब उनकी अपनी जिम्मेवारी होगी कि वो विपक्ष के तरफ से क्रॉस वोट रोकें. अमरेंद्र धारी सिंह यानी एडी सिंह को महागठबंधन के 35 वोटों के अलावा एआईएमआईएम के पांच और बीएसपी के एकलौते विधायक का भी वोट चाहिए, वैसे एआईएमआईएम ये कह रही है कि वो भी अपना उम्मीदवार देगी. कुल मिलाकर बिहार के पांच सीटों के लिए होने वाला राज्यसभा का चुनाव बहुत रोचक और कांटे का हो गया है, जहां आपको क्रॉस वोटिंग देखने को मिल सकती है.

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