Bihar: 1 करोड़ के इनामी नक्सली की मूर्ति हटाने पहुंची पुलिस, एक फोन कॉल से उलटे पांव बैरंग लौटी फोर्स

Jehanabad News: जहानाबाद के शुकुलचक गांव में कुख्यात नक्सली देवकुमार उर्फ अरविंद की प्रतिमा हटाने पहुंची पुलिस को ग्रामीणों का भारी विरोध सहना पड़ा. लोगों का कहना है कि उसकी पुण्यतिथि पर लोग यहां आकर श्रद्धांजलि देते है. पढ़िए रंजन सिन्हा की ये रिपोर्ट.

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1 करोड़ का इनामी नक्सली देवकुमार
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 बिहार के जहानाबाद जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां पुलिस प्रशासन एक हार्डकोर नक्सली की प्रतिमा को ध्वस्त करने भारी लाव-लस्कर के साथ पहुंची, लेकिन कार्रवाई के बीच में ही उसे उलटे पांव वापस लौटना पड़ा.यह घटना जिले के सिकरिया थाना क्षेत्र के शुकुलचक गांव का है. 

भारी संख्या में पुलिस बल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी
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भारी पुलिस बल के साथ शुरू हुई थी कार्रवाई

रविवार को सुकुलचक गांव निवासी उस समय अफरा तफरी का मच गई. रविवार को भारी संख्या में पुलिस बल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में गांव पहुंचा था. वह वहां बनी दिवंगत हार्डकोर नक्सली नेता देवकुमार उर्फ अरविंद की प्रतिमा  को हटाने गई थी. जैसे ही प्रतिमा को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी पुलिस के वरीय अधिकारियों का एक फोन कॉल आया और अचानक कार्रवाई को स्थगित करने का निर्देश दिया गया. और पुलिस बैरंग वापस लौट गई.उसके परिजनों ने अपनी निजी जमीन पर यह प्रतिमा बनवाई थी.

कौन था 1 करोड़ का इनामी नक्सली देवकुमार

दरअसल, जिस ​व्यक्ति की प्रतिमा को लेकर यह पूरा विवाद खहटाने के लिए पुलिस गई थी वह को ई साधारण अंसान नहीं था.  व्यक्ति का नाम देवकुमार उर्फ अरविंद था. वह एक कुख्यात नक्सली था, जिसके खिलाफ झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में दर्जनों नक्सली मामले दर्ज थे. उसका खौफ ऐसा था कि सरकार ने उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ने वाले के लिए एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. मार्च 2018 में झारखंड के जंगलों में बीमारी के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने गांव में उसकी प्रतिमा स्थापित की थी.

ग्रामीणों और परिजनों में भारी नाराजगी
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ग्रामीणों का विरोध और प्रशासनिक चुप्पी

 ​पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों में भारी नाराजगी देखी गई. ग्रामीणों का कहना है कि ​यह प्रतिमा निजी जमीन पर बनाई गई है. ​हर साल देवकुमार की पुण्यतिथि पर लोग यहां आकर श्रद्धांजलि देते थे. फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया है कि आखिर कार्रवाई को बीच में ही क्यों रोका गया और वह 'फोन कॉल' किसका था जिसने प्रशासन के कदम रोक दिए.

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