बोधगया के महाबोधि मंदिर में प्लास्टिक की थैली में प्रसाद-फूल लाए तो नहीं मिलेगी एंट्री, जानें नए नियम

Bihar News: बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी सचिव श्वेता महारथी ने कहा कि उनकी इस पहल को सिक्किम के मुख्यमंत्री ने भी सराहा है. उन्होंने मंदिर में निगमा मोलनम पूजा के आयोजकों से भी बात की है कि वे लोग भी पूजा के दौरान प्लास्टिक का उपयोग न करें.रंजन सिन्हा की रिपोर्ट...

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बोधगया के महाबोधि मंदिर में प्लास्टिक बैन.
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  • बिहार के बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर में प्लास्टिक सामानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है
  • मंदिर के एंट्ररी गेट पर प्लास्टिक बैन का स्पष्ट बोर्ड लगा है और सुरक्षा कर्मियों को भी निर्देश दिए गए हैं
  • मंदिर की निगमा मोलनम पूजा में प्लास्टिक रैपर में बंद प्रसाद, फूल का उपयोग पूरी तरह बंद किया गया है
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गयाजी:

बिहार के बोधगया में भगवान बुद्ध की ज्ञान स्थली महाबोधि मंदिर में प्लास्टिक और प्लास्टिक रैपर में बंद सामानों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी ने मंदिर परिसर में प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक थैला समेत प्लास्टिक से बना अन्य सामान ले जाने पर प्रतिबंध लागू किया है. इतना ही मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी प्लास्टिक बैन का होर्डिंग लगा दिया है. एंट्री गेट पर सुरक्षा कर्मियों को खास निर्देश दिए गए है कि कोई भी श्रद्धालु प्लास्टिक की कोई भी सामग्री अंदर लेकर न जाए.

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महाबोधि मंदिर में प्लास्टिक बैन

महाबोधि मंदिर में विश्व शांति के लिए चल रहे निगमा मोलनम पूजा में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होगा.  पूजा में शामिल श्रद्धालु और भिक्षु प्लास्टिक रैपर में बंद प्रसाद, फूल या अन्य पूजन सामग्री का उपयोग नहीं कर रहे हैं. बता दें कि य फैसला पर्यावरण संरक्षण और महाबोधि परिषर की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया गया है. 

बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी सचिव श्वेता महारथी ने कहा कि टेंपल मैनेजमेंट ने पहले से ही वातावरण को प्लास्टिक मुक्त करने की पहल की हुई है. हर बार इसे लेकर कुछ अलग होता है. मंदिर में बड़ी पूजा के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश होती है. उन्होंने कहा कि यह मंदिर ही नहीं समय की मांग है कि प्लास्टिक की चीजों का उपयोग नहीं किया जाए. यह वातावरण में प्रदूषण फैलता है.

वातावरण को प्लास्टिक मुक्त करने की पहल

उन्होंने कहा कि कोशिश कर रहे हैं कि मंदिर में श्रद्धालु प्लास्टिक के थैलो में प्रसाद नहीं लाएं. अगर कोई ऐसा करता है तो उस प्रसाद को न चढ़ाया जाए. हाथ से बनी चीजों का ही उपयोग हो, जैसे कपडे का बना थैला या बांस की बनी कटोरी. इसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली है. तिब्बती श्रद्धालुओं ने प्लास्टिक की कटोरियों से मंदिर में जल चढ़ाना बंद कर दिया है. इस बात को सभी देश -विदेश के श्रद्धालु भी समझते हैं. अब स्टील या कागज के बने बर्तन में ही जल अर्पित करते हैं.

श्वेता महारथी ने कहा कि उनकी इस पहल को सिक्किम के मुख्यमंत्री ने भी सराहा है. उन्होंने मंदिर में निगमा मोलनम पूजा के आयोजकों से भी बात की है कि वे लोग भी पूजा के दौरान प्लास्टिक का उपयोग न करें. पूजा कमेटी  ने कहा है कि वह अपने पूजा मंच से भी इसका प्रचार करेंगे. 

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देश को जीरो बेस्ट बनाने पर फोकस

वहीं निगमा मोलनम पूजा के आयोजक समिति के सदस्य टेरिंग लामा ने बताया की अभी महाबोधि मंदिर में निगमा मोलनम पूजा चल रही है. इसका मकसद विश्व में शांति लाना और इसके लिए सोच में बदलाव लाना है. सभी लोगों में करुणा जगाने के लिए पूजा चल रही है. इस पूजा में नेपाल , सिक्किम , साउथ इंडिया , भूटान समेत कई देश के हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं. इसमें पीएम मोदी के कहे मुताबिक, एक अभियान शरू किया है. पीएम मोदी ने देश को जीरो बेस्ट बनाने की अपील की थी., ताकि भारत साफ सुथरा हो सकें. श्रद्धालु प्लास्टिक रैपर में प्रसाद नहीं ला रहे हैं. 


 

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