बीजेपी ने बिहार में सरकार बनाने की क़वायद तेज कर दी है और अब घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है. माना जा रहा है कि बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है, इसलिए पार्टी इस प्रक्रिया को पूरी तैयारी और औपचारिक तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है. पार्टी के अंदर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंतिम रणनीति तैयार की जा रही है. पार्टी ने सरकार बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करते हुए विधायक दल की बैठक बुलाने का फ़ैसला किया है. इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति भी कर दी गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया पार्टी के नियम और परंपरा के अनुसार हो सके. यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार बीजेपी सीधे तौर पर मुख्यमंत्री का पद संभालने जा रही है और पार्टी इस फैसले को संगठनात्मक मजबूती के साथ लागू करना चाहती है.
BJP ने बड़े OBC चेहरा शिवराज को बनाया पर्यवेक्षक
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री तथा पार्टी के बड़े ओबीसी चेहरे शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया है. बीजेपी संसदीय बोर्ड ने यह फैसला लिया है. शिवराज सिंह चौहान का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे खुद लंबे समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं और संगठन के भीतर उनका अनुभव काफी बड़ा माना जाता है. साथ ही वे ओबीसी समुदाय के मजबूत चेहरे हैं, इसलिए उनके जरिए पार्टी सामाजिक और राजनीतिक संतुलन का संदेश भी देना चाहती है.
नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक 14 अप्रैल को
14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आखिरी बार कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे हैं. इसके बाद वे राज्यपाल से मिलकर अपना त्यागपत्र सौंप देंगे. यह कदम औपचारिक रूप से सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया की शुरुआत माना जाएगा. जैसे ही मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे, उसके बाद नई सरकार बनाने की संवैधानिक प्रक्रिया तेज हो जाएगी.
14 को ही बीजेपी विधायक दल की बैठक
नीतीश के त्यागपत्र के बाद बीजेपी विधायक दल का नेता चुना जाएगा. इसके लिए पटना में बीजेपी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है. शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में विधायक दल का नेता चुना जाएगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और औपचारिक तरीके से पूरी हो सके. इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक भी होगी, जिसमें बीजेपी विधायक दल के नेता के नाम पर अगले मुख्यमंत्री के तौर पर अंतिम मुहर लगेगी.
सम्राट के रहते विधायक दल की बैठक, क्या यह बदलाव का संकेत
राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस पूरी प्रक्रिया में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि पार्टी फिर से विधायक दल की बैठक बुला रही है, जबकि वर्तमान में सम्राट चौधरी ही बीजेपी विधायक दल के नेता हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें दोबारा नेता चुना जाएगा या फिर पार्टी किसी नए चेहरे को सामने ला सकती है. यही वजह है कि इस बैठक को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
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किसी ओबीसी को कमान दे सकती है बीजेपी
इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी किसी बड़े ओबीसी नेता को ही मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दे सकती है. बिहार की राजनीति में ओबीसी वर्ग का प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है और बीजेपी लंबे समय से इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इसलिए मुख्यमंत्री के चयन में जातीय संतुलन और चुनावी रणनीति दोनों को ध्यान में रखा जा सकता है.
फिलहाल सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे
फिलहाल उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है. वे संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है. लेकिन राजनीति में अंतिम फैसला अक्सर आखिरी समय में लिया जाता है, इसलिए अन्य नामों को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. विधायक दल की बैठक और उसके बाद होने वाले फैसले से यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी और बीजेपी किस नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है.
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