बिहार चुनाव: हर विधानसभा से गौ रक्षक प्रत्‍याशी उतारेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, किसके वोट बैंक में करेंगे सेंधमारी?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्पष्ट कह रहे हैं कि वे सभी 243 सीट पर गौरक्षक को उम्मीदवार बनाएंगे. हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नामांकन के बाद ही उम्मीदवार तय होंगे.

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  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूर्णिया में गौ रक्षा पर जोर देते हुए गौ रक्षक उम्मीदवार उतारने की घोषणा की.
  • उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से जितनी सरकारें बनीं, वे सभी गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाने में विफल रही हैं.
  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनेताओं पर धर्म की चार वर्ण व्यवस्था को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया.
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माता सीता की स्थली पुनौरा धाम से गौ मतदाता संकल्प यात्रा की शुरूआत करने वाले जगद्गुरू शंकराचार्य  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरुवार को पूर्णिया पहुंचे. उन्होंने गौ रक्षा पर बल देते हुए सभी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कोई भी दल गौ रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध नही है, लिहाजा गौ रक्षा के लिए वे हर विधानसभा क्षेत्र से गौ रक्षक प्रत्याशी को मैदान में उतारेंगे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी आरोप लगाए. उन्होंने गौ हत्या के लिए आजादी के बाद से अब तक के सरकार को जिम्मेवार बताया.

बहरहाल, बड़ा सवाल ये है कि अगर गौ रक्षक उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा?

राजनेताओं पर लगाया सनातनियों को बांटने का आरोप

शंकराचार्य ने कहा कि राजनेताओं के कारण और तथाकथित उनकी राजनीति के कारण हमारा सनातन धर्म प्रभावित हो रहा है. हमारे धर्म मे चार वर्ण की व्यवस्था है,ब्राह्मण,क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र.वेदों में स्पष्ट कहा गया है कि चारों वर्ण भगवान से पैदा हुए हैं,मतलब सभी भाई-भाई हैं. लेकिन इन बातों को तोड़-मरोड़ कर सनातन धर्म के लोगों को ही एक दूसरे के सामने खड़ा किया जा रहा है और जिससे सनातन धर्म कमजोर हो रहा है.

गाय हमारी माता, लेकिन सरकार काटने का लाइसेंस दे रही

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जिस गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, जिसे हम पूजते हैं, हमारे ही देश में उसकी बोटी-बोटी काटकर बेची जा रही है. डॉलर के लिए सरकार उसे काटने का लाइसेंस दे रही है. ये सरकार हम सनातनियों के वोट से ही बनती है और हमारा वोट लेकर हमारी मां को ही काटोगे, यह धृष्टता आजादी के बाद से लगातार हो रही है. 

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हमने आजादी की लड़ाई में इसलिए भाग लिया क्‍योंकि कहा गया कि आजादी मिलने पर गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. लेकिन ऐसा नही हुआ. 80 साल का समय राजनेताओं ने आश्वासन में बिता दिया. हमने दूसरे दलों को भी मौका दिया लेकिन उसने भी वही किया. कहा कि हमारे घर मे पहली रोटी गाय के लिए बनती है. इसका मतलब हमारी प्राथमिकता गाय है. हमें गौ रक्षा के लिए वोट करने की जरूरत है. उन्होंने उम्मीद जताया कि चूंकि यह देश गौ भक्तों का देश है इसलिए आज न कल देश मे गौभक्तों की सरकार बनेगी.

सबका साथ, सबका विश्वास छल की नीति

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राजनेताओं ने हमे भ्रम में डाल रखा है.कभी गाय की पूजा करते फ़ोटो तो कभी गाय को दुलारते फ़ोटो तो कभी आरती उतारते फ़ोटो दिखाकर खुद को हिन्दू बताते हैं.कोई खुद को हिन्दू कहे तो उसे वोट मत दीजिए. कोई दल हिन्दू नही हो सकता,कोई नेता हिन्दू है या नही कहा नही जा सकता. इसलिए पार्टी और नेता को हिन्दू नही मानकर हिन्दू मुद्दे पर वोट देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यह जो सबका साथ, सबका विश्वास की नीति है, सही नीति नही है, यह छल और प्रवंचना की नीति है. हमें भ्रम में डालकर हमारी ही माता को काटते हैं, यह नीति अब नही चलेगी.

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कहा- सनातनी राजनीति एकमात्र विकल्प

शंकराचार्य ने कहा कि गौ-रक्षा के लिए जरूरी है कि देश मे सनातनी राजनीति की शुरुआत हो. यह देश सनातनियों का है और यहां 80 करोड़ सनातनी रहते हैं.सनातनियों की भी अपनी राजनीतिक धारा होनी चाहिए. कहा कि यहां रूस, चीन और अमेरिकी विचारधारा की राजनीति तो चलती है लेकिन इस देश में सनातनी विचारधारा की कोई अहमियत नही है.

शंकराचार्य ने पीएम मोदी का बिना नाम लिए पूर्णिया में 15 सितंबर को उनके द्वारा दिये घुसपैठियों से संबंधित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि यहां एक बड़े नेता आये थे और कह रहे थे कि यहां घुसपैठ हो रही है. कहा कि कैसे घुसपैठ हो रही है, मतलब तुम रोक नही पा रहे हो! इसलिए तो तुम्हे दंडित किया जाना चाहिए. जब घुसपैठ हो रही है तो हम तुम्हें क्यों वोट दें? यह सरकार कमजोर सरकार है. 

शंकराचार्य के निशाने पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रहे. रामभद्राचार्यजी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कहा है कि पश्चिमी यूपी मिनी पाकिस्तान बन गया है. 6 साल से वहां योगी आदित्यनाथ हैं. इसका मतलब उनके राज में मिनी पाकिस्तान बन गया है. यह आपत्तिजनक है. अगर वे उसे नही रोक पा रहे हैं तो वे अक्षम हैं. इसका मतलब है अलग ही सांठगांठ चल रहा है.

किसे नुकसान पहुचाएंगे गौरक्षक उम्मीदवार?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्पष्ट कह रहे हैं कि वे सभी 243 सीट पर गौरक्षक को उम्मीदवार बनाएंगे. हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नामांकन के बाद ही उम्मीदवार तय होंगे. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर गौरक्षक उम्मीदवार किस गठबंधन का खेल खराब करेंगे. पहली नजर में ऐसा लगता है कि गौरक्षक उम्मीदवार एनडीए को ही नुकसान पहुचायेंगे. लेकिन यह कहना भी जल्दीबाजी होगी क्योंकि, खासकर सीमांचल के इलाके में जहां वोटों का ध्रुवीकरण होता रहा है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यह बाजी इंडिया गठबंधन के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकती है. अब, जबकि चुनाव में कम दिन शेष रह गए हैं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौरक्षा के मुद्दे को उठाकर एक नई बहस छेड़ दी है. 

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