बिहार चुनाव में महापर्व छठ पर राजनीति, राहुल के बयान पर पीएम मोदी का पलटवार

पीएम मोदी ने कहा कि क्या निर्जला उपवास करने वाली महिला इसे बर्दाश्त करेगी? आरजेडी कांग्रेस के नेता कैसे बेशर्मी से बोल रहे हैं कि छठी मइया की पूजा ड्रामा और नौटंकी है. ऐसे लोगों को सजा दोगे या नहीं दोगे, जो महिलाएं निर्जला जैसी कठिन व्रत रखती हैं?

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बिहार विधानसभा चुनाव अब धीरे-धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रहा है और राजनीति के इस हवन में एनडीए और महागठबंधन दोनों की तरफ से आहुतियां दी जा रही हैं. वो कहते हैं ना बोली गोली से भी ज्यादा चोट करती है और इस राजनीतिक खेल में एक-दूसरे की बोली पर ही राजनीति हो रही है. अब राहुल गांधी को लेकर ही लीजिए... उन्होंने पीएम मोदी पर वार करते हुए एक बयान दिया, जिसे लेकर पीएम मोदी ने आज उन पर बड़ा निशाना साधते हुए कहा कि छठी मईया की पूजा कांग्रेस और आरजेडी को ड्रामा लगती है.

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पीएम मोदी ने कहा कि क्या निर्जला उपवास करने वाली महिला इसे बर्दाश्त करेगी? आरजेडी कांग्रेस के नेता कैसे बेशर्मी से बोल रहे हैं कि छठी मइया की पूजा ड्रामा और नौटंकी है। ऐसे लोगों को सजा दोगे या नहीं दोगे, जो महिलाएं निर्जला जैसी कठिन व्रत रखती हैं?

ये था राहुल गांधी का बयान

राहुल ने कहा था कि पीएम मोदी को यमुना से कुछ लेना-देना नहीं, उनको छठ पूजा से कुछ लेना देना नहीं. उन्हें सिर्फ आपका वोट चाहिए. अगर आप कहोगे कि नरेंद्र मोदी जी आप ऐसा ड्रामा करो वो कर देंगे. जो भी करवाना है करवा लो. उनको कहो भैया कि हम आपको वोट देंगे, आप स्टेज पर आकर नाच लो, वो नाच लेंगे. चुनाव के बाद वो नहीं दिखाई देंगे.

राजनीति का खेल

गैर-सरकारी आंकड़ों को मानें तो इस छठ में करीब 1 करोड़ प्रवासी बिहारी अपने घर गांव लौटे हैं. सामाजिक विश्लेषक मानते हैं कि ये वोटर छठ बाद चुनाव तक रुकने वाले हैं और बिहारी समाज में अपने अपने घर, टोला, गांव में बाहर कमाने वाले की बात सुनी जाती है तो कहीं वोटर प्रशांत किशोर की तरफ न मुड़ जाए, लेकिन इनका बड़ा हिस्सा भाजपा शासित प्रदेशों से आया है. मसलन महाराष्ट्र , गुजरात , हरियाणा, पश्चिमी यूपी इत्यादि, तो उसका प्रभाव भी पड़ेगा. इस माहौल में राहुल गांधी का पीएम मोदी पर वार करते हुए छठ वाला बयान बहुत तेजी से भाजपा ने उछाला, जितनी तेजी से उछाला गया, उससे ज्यादा तेजी से मीडिया ने भी उसे प्रमुखता दी. बिहार का जनमानस काफी संवेदनशील है, मार्मिक बयान हाथोंहाथ लिए जाते हैं, जो चुनावी बाजी पलटने की ताकत भी रखते हैं. ऐसे में दोनों पार्टियों को ध्यान रखना होगा कि कहीं सेल्फ गोल न हो जाए. 

खैर, चुनावी समय है तो हर दिन ऐसे सैकड़ों बयान दोनों तरफ से उछाले जाएंगे . कुछ हिट विकेट होंगे तो कुछ निशाने पर लगेंगे . किस टीम ने कितने गोल किए ये 6 नवंबर और 11 नवंबर को होने वाले मैच में पता चलेगा, रिजल्ट 14 नवंबर को आएगा . फिलहाल जनता दोनों टीम की बयानबाजी वाली खेल देखने में व्यस्त है.

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