Gopalpur Election Result: जेडीयू को मिली लगातार 5वीं जीत, 3 बार के विधायक को बुलो मंडल ने हराया

गोपालपुर में जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल ने यहां पर बड़ी जीत दर्ज की है. पिछले तीन चुनावों में लगातार जीत हासिल करने वाले नरेंद्र कुमार उर्फ गोपाल मंडल को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा है.

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बिहार चुनाव 2025 में भागलपुर जिले की गोपालपुर विधानसभा सीट पर जेडीयू की जीत का सिलसिला इस बार भी कायम रहा है. जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल ने यहां पर बड़ी जीत दर्ज की है. पिछले तीन चुनावों में लगातार जीत हासिल करने वाले नरेंद्र कुमार उर्फ गोपाल मंडल को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा है. दूसरे नंबर पर वीआईपी पार्टी के प्रेम सागर रहे. 

गोपालपुर में जेडीयू के बुलो मंडल को 1,08,630 वोट मिले हैं. उन्होंने 58,135 वोटों से विकासशील इंसान पार्टी के प्रेम सागर उर्फ डबलू यादव को हराया है. 2010, 2015 और 2020 में जेडीयू के टिकट पर जीत हासिल करने वाले  और इस बार टिकट कटने पर निर्दलीय मैदान में उतरे गोपाल मंडल को महज 12,686 वोट ही मिल पाए.  यहां गोपालपुर में इस बार 69.19 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी.

प्रत्याशीपार्टीकुल वोट
शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडलजेडीयू108630
प्रेम सागर उर्फ डबलू यादववीआईपी50495 
नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडलनिर्दलीय12686 
मनकेश्वर सिंह उर्फ मंटू सिंहजन सुराज पार्टी4701 
संजीव कुमार यादवनिर्दलीय4472 
सोनी भारतीनिर्दलीय1651 
भारत भूषण गनपति लोकशक्ति पार्टी (लोकतांत्रिक) 1529 
सुमन कुमारबसपा1171 
राजीव कुमार सिंहनिर्दलीय691 
पीयूष झा

निर्दलीय

594
नोटा4782 

पिछली हार-जीत: जदयू का रहा है दबदबा

गोपालपुर सीट पर पिछले चार चुनावों (2005 से 2020) लगातार जदयू के कब्जे में रही है. 2020 के चुनाव में गोपाल मंडल (जदयू) ने राजद के शैलेश कुमार को भारी अंतर (24,461 वोटों) से हराया था. 2015 में गोपाल मंडल जो कि तब महागठबंधन में थे, ने बीजेपी के अनिल यादव को 5,169 वोटों से शिकस्त दी थी. उससे पहले 2010 के चुनाव में गोपाल मंडल (जदयू) ने राजद को 25,060 वोटों से हराया था.

वोटों का गणित और जातीय समीकरण

गोपालपुर में कुल 3.83 लाख मतदाता हैं. जातीय समीकरणों में यादव (18%) सबसे बड़ा समूह है, जो पारंपरिक रूप से राजद का आधार रहा है. हालांकि पिछले कुछ चुनावों में यह सीट तीन बार से जदयू के पास थी, जिसका कारण कुर्मी (12%) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का मजबूत समर्थन रहा है. दलित (25%) और मुस्लिम (15%) मतदाता भी यहां पर परिणाम को प्रभावित करते हैं.

प्रमुख मुद्दे क्या रहे?

गोपालपुर की राजनीति भौगोलिक चुनौतियों और मजबूत जातीय ध्रुवीकरण पर टिकी है. यह क्षेत्र गंगा और कोसी नदियों से घिरा होने के कारण हर साल बाढ़ और विस्थापन की समस्या झेलता है, जो यहां का सबसे बड़ा स्थायी मुद्दा है. किसानों को मुआवजा और पुल व सड़क संपर्क का विकास यहां के प्रमुख चुनावी वादे हैं.

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