बिहार में बगैर आयुष्मान कार्ड बने हो रहा पेमेंट... CAG रिपोर्ट पर आज विधानसभा हो सकती है गरम

बिहार में योजना के संचालन के लिए नामित एजेंसी बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के डेटा बेस में 2900 लाभार्थियों के नाम की जगह "&, #, &# और %" जैसे कैरेक्टर लिखे हुए हैं.

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बिहार में आयुष्मान कार्ड पर सीएजी रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है.
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  • बिहार में आयुष्मान भारत योजना के तहत बिना बायोमैट्रिक सत्यापन के कई मामलों में राशि का भुगतान किया गया है
  • कैग रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसे कार्ड जिनका अस्तित्व नहीं था, उन पर 25 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई
  • योजना संचालन के लिए नियुक्त नोडल एजेंसी में आधे से अधिक पद खाली थे और सीईओ पद भी अतिरिक्त प्रभार के रूप में था
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बिहार में आयुष्मान भारत योजना के संचालन में भारी अनियमितता हुई है. स्वास्थ्य विभाग ने उन कार्ड पर आयुष्मान योजना की राशि ट्रांसफर कर दी, जो बने ही नहीं थे. इसके अलावा बिना बायोमैट्रिक सत्यापन के 50 हजार से अधिक मामलों में राशि का भुगतान किया गया. अस्पतालों के चयन में भी गड़बड़ी हुई और गलती करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई भी नहीं की गई. कैग की रिपोर्ट में यह सभी बातें सामने आईं हैं. बिहार विधानसभा में बृहस्पतिवार को कैग की रिपोर्ट पेश की गई. सितंबर 2018 से लेकर मार्च 2024 तक आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की पूरी रिपोर्ट तैयार की गई है. कैग की रिपोर्ट विधानसभा में गुरुवार को प्रस्तुत की गई. शुक्रवार को बजट सत्र का आखिरी दिन है. ऐसे में विपक्ष इस रिपोर्ट के हवाले सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है. 

200 करोड़ रुपये हुए ट्रांसफर

आयुष्मान योजना में भर्ती और छुट्टी के समय आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य है. अगर किसी के पास आधार कार्ड नहीं है तो वह एक बार इलाज करा सकता है. बिहार में 1 लाख 72 हजार 696 मामलों में भर्ती और छुट्टी के समय बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के बगैर करीब 200 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई. इसमें 52 हजार मामले एक बार से अधिक इलाज के हैं, जो नियम के विपरीत हैं. हालांकि विभाग ने बताया कि कभी अगर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं होता है तो उसे स्पेशल केस के रूप में लिस्ट किया जाता हैस लेकिन एक बार से अधिक इलाज नियम के विपरीत है, जिसके 52 हजार से अधिक मामले हैं. कैग ने इसे निगरानी की कमी माना है.

25 लाख रुपये बगैर कार्ड पेमेंट

कैग ने पाया कि 139 ऐसे कार्ड पर 25 लाख रुपये से अधिक का भुगतान हो गया, जो बने ही नहीं थे. यह कार्ड किसी डेटाबेस में नहीं थे, लेकिन इन पर भुगतान हो गया. इनएक्टिव कार्ड पर भी भुगतान हुआ है. 2186 ऐसे कार्ड पर 2 करोड़ 31 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की गई, जो निष्क्रिय हो गए थे. इनमें कुछ कार्ड तो 5 साल पहले निष्क्रिय हो गए थे, लेकिन उन पर भुगतान हुआ. विभाग ने माना कि 2069 निष्क्रिय कार्ड पर इलाज कराया गया था, इनमें 47 को ही धोखाधड़ी के रूप में चिन्हित किया गया, 1963 मामले सही पाए गए. हालांकि, विभाग ने जिन मामलों को सही पाया उसके सही होने के दस्तावेज कैग को नहीं सौंप पाया. 

मनमानी करने वालों पर कार्रवाई नहीं

कैग ने अपनी जांच में पाया कि कई ऐसे प्राइवेट हॉस्पिटल को आयुष्मान योजना के तहत लिस्ट किया गया, जिनके पास बेसिक फैसिलिटी नहीं थी. 23 अस्पतालों के पास न तो पर्याप्त जगह थी और न ही पर्याप्त डॉक्टर, नर्स. चौबीस घंटे एंबुलेंस सेवा भी नहीं थी, इमरजेंसी सेवा के न्यूनतम आवश्यक मानक भी वे पूरा नहीं करते थे. फिर भी उन्हें लिस्ट किया गया. यहां तक कि 5 अस्पतालों को फिजिकल वेरिफिकेशन के बगैर आयुष्मान कार्ड योजना से इलाज की अनुमति दे दी गई. अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक में 23 निजी अस्पतालों को निलंबित किया गया, लेकिन विभाग ने इन पर समय से जुर्माना लगाने, FIR करने जैसी आवश्यक कार्रवाई नहीं की. विभाग ने कहा कि कई अस्पतालों को योजना के शुरुआती फेज में लिस्ट किया गया था, इसलिए वहां कुछ खामियां मिली हैं. 

2900 लाभार्थी के नाम "&, #, &# जैसे

बिहार में योजना के संचालन के लिए नामित एजेंसी बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के डेटा बेस में 2900 लाभार्थियों के नाम की जगह "&, #, &# और %" जैसे कैरेक्टर लिखे हुए हैं. 1 करोड़ 83 लाख से अधिक लाभार्थियों के मां के नाम की जगह खाली है और 88 हजार से अधिक लाभार्थियों के पिता के नाम में कुछ भी लिखा हुआ नहीं है. इसके अलावा लाभार्थियों के वेरिफिकेशन में भी गड़बड़ी सामने आई है. 

जिस एजेंसी पर जिम्मेदारी, वही कमजोर

बिहार में योजना के संचालन के लिए बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति को नोडल एजेंसी बनाया गया है. मार्च 2024 तक एजेंसी में 55% पद खाली थे. 2018 से 2024 तक एजेंसी के सीईओ का पद भी अतिरिक्त प्रभार के रूप में संचालित किया जाता रहा. कैग को दिए गए कई सवालों के जवाब में एजेंसी ने माना है कि पर्याप्त वर्क फोर्स की कमी के कारण योजना के संचालन में अनियमितता हुई है. 

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