बिहार विधानसभा में UGC पर हंगामा, माले विधायक के 'ब्राह्मणवाद' वाली टिप्‍पणी पर भड़के डिप्टी CM

बिहार विधानसभा में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन और ब्राह्मणवाद शब्द को लेकर तीखा विवाद हुआ, जिसमें विधायक एक-दूसरे पर उंगली दिखाने लगे.

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  • बिहार विधानसभा में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन लागू करने को लेकर माले विधायक ने कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया था
  • संदीप सौरव ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत उत्पीड़न बढ़ने की बात कही
  • भाजपा सदस्यों ने संदीप सौरव के ब्राह्मणवादी ताकतों के आरोप पर आपत्ति जताई, जिससे सदन में हंगामा हुआ
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पटना:

बिहार विधानसभा में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन और ब्राह्मणवाद शब्द पर जबरदस्त हंगामा हुआ. पक्ष-विपक्ष के दो विधायक एक दूसरे को उंगली दिखाने लगे. दरअसल, माले विधायक संदीप सौरव UGC इक्विटी गाइडलाइन लागू करने की मांग को लेकर कार्यस्थगन प्रस्ताव लेकर आये, जिस पर विवाद इतना बढ़ गया कि  उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा आगबबूला हो गए.  

उठी एक-दूसरे पर उंगलियां...

संदीप सौरव ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थाओं में जातिगत आधार पर भेदभाव हो रहा है. एक्ट लागू करना जरूरी है. उच्च शिक्षण संस्थानों में 118% जातिगत उत्पीड़न बढ़ा है. इसलिए यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन लाया गया, लेकिन ब्राह्मणवादी ताकतों के आंदोलन के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी. संदीप सौरव के 'ब्राह्मणवादी ताकतों' के प्रयोग पर भाजपा के सदस्यों ने आपत्ति जताई. स्पीकर प्रेम कुमार ने कहा कि ब्राह्मण शब्द कार्यवाही से हटाया जाएगा. इस पर विपक्षी सदस्य खड़े हो गये और हंगामा करने लगे. भाजपा विधायक मुरारी मोहन झा और संदीप सौरव में तीखी बहस हुई. दोनों एक दूसरे को उंगलियां दिखाने लगे. 

विजय सिन्हा ने कहा, 'मैं भूमिहार ब्राह्मण, मेरी रैगिंग हुई.'

हंगामे के बीच उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा, 'मैं भूमिहार ब्राह्मण हूं, लेकिन मेरी रैगिंग हुई. मुझे हॉस्टल से निकाला गया. तब किसकी सरकार थी? यह लोग जाति विहीन समाज के बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों को तार-तार कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है. यह संविधान की शपथ लेकर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं.
 
ब्राह्मणवाद का जिक्र किया, ब्राह्मण का नहीं

इस पर विपक्ष की तरफ से आलोक मेहता ने कहा कि संदीप सौरव ने किसी जाति का नाम नहीं लिया. उन्होंने ब्राह्मणवाद का जिक्र किया, ब्राह्मण का नहीं. हालांकि, भाजपा विधायक शांत नहीं हुए. मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यह लोग ब्राह्मणवाद के बारे में नहीं जानते हैं. इन्हें ब्राह्मणों से दिक्कत है. ब्राह्मणों के बिना न तो शादी होती है और न ही श्राद्ध होता है.

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