बिहार चुनाव: दूसरे चरण में 'महा बंपर' वोटिंग, सीमांचल और ग्रामीण इलाकों में लगी वोटर्स की लंबी कतार, किसे होगा फायदा?

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदाताओं की मतदान केंद्रों पर लंबी कतार देखने को मिल रही है. आइए जानते हैं बंपर वोटिंग से किसे फायदा हो सकता है?

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  • बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में सीमांचल, मगध, अंग और मिथिलांचल के जिलों में बंपर वोटिंग
  • सीमांचल के जिलों में 1 बजे तक औसतन पचास प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ है, जो राज्य के अन्य हिस्सों से अधिक है
  • महिला मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है, कई केंद्रों पर महिलाओं की कतारें पुरुषों से लंबी देखी गईं
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पटना:

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं का उत्साह चरम पर है. मंगलवार को 122 सीटों पर हो रहे मतदान में दोपहर 1 बजे तक पिछले चुनाव की तुलना में अधिक वोटिंग दर्ज की गई है.  लोकतंत्र के महापर्व को लेकर लोगों में जमकर उत्साह देखने को मिल रहा है. इस चरण में सीमांचल, मगध, अंग और मिथिलांचल के कई जिलों में मतदान हो रहा है. खास बात यह है कि सीमांचल की सीटों पर औसतन 50 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हो चुकी है, जो राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी अधिक है.

सीमांचल के इलाकों में मतदाताओं की लंबी कतारें सुबह से ही देखने को मिल रही हैं. किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार जैसे जिलों में मतदान केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ रही है.

महिला मतदाताओं की भागीदारी भी इस चरण में उल्लेखनीय रही है. कई मतदान केंद्रों पर महिलाओं की कतारें पुरुषों से लंबी देखी गईं. यह रुझान पिछले कुछ वर्षों में बिहार चुनावों में लगातार देखने को मिल रहा है, जहां महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंच रही हैं. 

हालांकि शहरी सीटों पर मतदान की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है. गया, भागलपुर जैसे बड़े शहरों में दोपहर तक मतदान प्रतिशत ग्रामीण इलाकों की तुलना में कम रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी मतदाता अक्सर मतदान के अंतिम घंटों में सक्रिय होते हैं, इसलिए शाम तक इन क्षेत्रों में भी मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी की उम्मीद है.

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इस चरण की एक और खास बात यह है कि इसमें कई बॉर्डर इलाकों में मतदान हो रहा है. नेपाल, झारखंड और पश्चिम बंगाल से सटे जिलों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों में मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जमीन से लेकर आसमान और साइबर स्पेस तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है. 

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर की मदद से हर संदिग्ध वस्तु और व्यक्ति की जांच की जा रही है. डीजीपी ने खुद पटना मेट्रो स्टेशन का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस न केवल सुरक्षा दे रही है, बल्कि नागरिकों से संवाद भी बनाए रख रही है ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी को कोई परेशानी न हो.

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में बंपर वोटिंग का असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ेगा. इन क्षेत्रों में कई सीटें ऐसी हैं जहां मुकाबला त्रिकोणीय है और हर वोट निर्णायक साबित हो सकता है. वहीं, सीमांचल की बढ़ी हुई भागीदारी से यह संकेत भी मिल रहा है कि स्थानीय मुद्दों पर मतदाता गंभीरता से विचार कर रहे हैं.

कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था की चाक-चौबंद तैयारी ने चुनाव को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आदर्श उदाहरण बना दिया है. शाम तक मतदान प्रतिशत में और वृद्धि की संभावना है, जिससे यह चरण राज्य के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है.

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