- बिहार विधानसभा का बजट सत्र दो फरवरी से शुरू होगा जिसमें सरकार विकास और कल्याण योजनाओं को पेश करेगी
- विपक्ष नीट छात्रा के रेप और मौत मामले को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है
- मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की राशि और लाभ वितरण को लेकर भी विपक्ष सरकार से सवाल पूछेगा
बिहार विधानसभा का बजट सत्र 2 फरवरी से शुरू होने वाला है. सत्र से पहले ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. सत्ता पक्ष जहां बजट के जरिए विकास, कल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक रोडमैप को पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दल कम संख्या बल के बावजूद सरकार को घेरने की रणनीति बना चुके हैं. इस बार विपक्ष के निशाने पर दो बड़े मुद्दे रहने वाले हैं. पहला-नीट छात्रा के रेप और मौत का मामला और दूसरा- मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना में दो लाख रुपये की राशि को लेकर उठ रहे सवाल.
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बजट सत्र में क्या होगी विपक्ष की रणनीति?
विधानसभा के अंदर और बाहर, दोनों जगह विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की योजना पर काम कर रहा है. विपक्षी नेताओं का मानना है कि भले ही सदन में उनकी संख्या कम हो, लेकिन जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाकर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया जा सकता है. इसी रणनीति के तहत सत्र के पहले दिन से ही हंगामा, स्थगन प्रस्ताव और नियमों के तहत चर्चा की मांग की तैयारी की जा रही है.
सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा नीट की तैयारी कर रही छात्रा के रेप और मौत का है. विपक्ष का आरोप है कि यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगेंगे कि जांच कहां तक पहुंची है, दोषियों की गिरफ्तारी और सजा को लेकर क्या प्रगति हुई है और पीड़िता के परिवार को अब तक क्या न्याय मिला है. विपक्ष का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राज्य में महिला सुरक्षा के दावों को कमजोर करती हैं.
सरकार को इन मुद्दों पर घेरेगा विपक्ष?
इस मामले को लेकर विपक्ष सदन में सरकार से स्पष्ट टाइमलाइन मांगने की तैयारी में है. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि क्या इस केस की निगरानी उच्च स्तर पर हो रही है और क्या जांच एजेंसियों पर किसी तरह का दबाव तो नहीं है. विपक्षी नेताओं का मानना है कि अगर सरकार इस मुद्दे पर संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो सदन के भीतर जोरदार विरोध दर्ज कराया जाएगा.
दूसरा अहम मुद्दा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ा है. विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की राशि को लेकर भ्रम की स्थिति है. विपक्ष का कहना है कि सरकार ने योजना की घोषणा तो बड़े स्तर पर की, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग है. कितनी महिलाओं को वास्तव में इस योजना का लाभ मिला, पैसे कैसे और किस शर्त पर दिए जा रहे हैं, और क्या यह राशि अनुदान है या ऋण, इन सवालों पर सरकार को घेरने की तैयारी है.
मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल जवाब
विपक्ष का दावा है कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर योजनाओं का प्रचार तो हो रहा है, लेकिन कई जिलों में पात्र महिलाओं को न तो पूरी जानकारी मिल पा रही है और न ही समय पर लाभ. इसी को लेकर विपक्ष सदन में आंकड़ों के साथ सरकार से जवाब मांगेगा. विपक्षी दल यह भी सवाल उठाएंगे कि योजना की मॉनिटरिंग व्यवस्था क्या है और इसमें पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है.
बजट सत्र में विपक्ष की रणनीति सिर्फ सवाल पूछने तक सीमित नहीं रहने वाली है. सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और नियम 329 के तहत चर्चा की मांग कर सकता है. इसके जरिए सरकार को सदन में विस्तृत जवाब देने के लिए मजबूर किया जाएगा. साथ ही, विपक्ष का फोकस यह दिखाने पर भी रहेगा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाकर सिर्फ बजट के आंकड़ों में उलझी हुई है.
विपक्ष के तेवरों पर क्या है सरकार की तैयारी?
वहीं, सत्ता पक्ष भी विपक्ष के तेवरों को लेकर पूरी तरह तैयार है. सरकार का दावा है कि नीट छात्रा मामले में जांच चल रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. महिला रोजगार योजना को लेकर भी सरकार का कहना है कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है और विपक्ष बिना पूरी जानकारी के भ्रम फैला रहा है. सत्तारूढ़ दल के नेता बजट सत्र में सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को मजबूती से रखने की रणनीति बना रहे हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बजट सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं. एक तरफ विपक्ष जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को दबाव में लाना चाहेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकार बजट के जरिए विकास और कल्याणकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी. कम संख्या बल के बावजूद विपक्ष की आक्रामक रणनीति सत्र की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती है.
2 फरवरी से शुरू होगा बिहार विधानसभा का बजट सत्र
कुल मिलाकर, 2 फरवरी से शुरू होने वाला बिहार विधानसभा का बजट सत्र केवल आर्थिक दस्तावेज पेश करने का मंच नहीं रहेगा, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर सियासी टकराव का अखाड़ा बनने जा रहा है. अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का किस तरह जवाब देती है और सत्र कितना सुचारू रूप से चल पाता है.













