- औरंगाबाद में पांच सहेलियों ने एक साथ जहर खा लिया था जिसमें चार की मौत हो गई
- जिंदा बची लड़की ने बताया कि घर वालों की फटकार से नाराज होकर वे सभी तालाब के पास जाकर जहर खा गईं थीं
- मृतक लड़कियों की उम्र बारह से पंद्रह साल के बीच थी और उनके परिवार प्रेम प्रसंग की बात को नकारते हैं
बिहार के औरंगाबाद से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक साथ 5 सहेलियों ने जहर खा लिया. इनमें से चार सहेलियों की मौत हो गई है. इस घटना में सिर्फ एक लड़की ही जिंदा बची. उसने बताया कि घर वालों ने डांटा था, इसी बात से नाराज होकर सबने एक साथ जहर खाने का फैसला किया था. घटना 29 जनवरी की है. परिजनों ने लड़कियों का अंतिम संस्कार भी कर दिया है.
एकमात्र जिंदा बची लड़की ने बताया कि 29 जनवरी की शाम को पांचों एक साथ गांव से दूर तालाब के पास गई थीं. वहां दोस्तों के साथ स्वाद चखने के लिए पक्षी मारने वाली जहरीली दवा खा ली. इसके बाद हम लोगों की तबीयत खराब होने लगी. इसमें 4 सहेलियों की तो मौके पर ही मौत हो गई. मैंने थोड़ी सी दवा खाकर थूक दी, इसलिए मैं बच गई. सहेलियों की मौत के बाद मैं काफी डर गई थी, इसलिए भागकर घर आ गई.
ये घटना हसपुरा थाना क्षेत्र के सैदपुर मोती बिगहा गांव की है. चारों लड़कियों का अंतिम संस्कार भी गांव वालों ने एक साथ कर दिया था. इस घटना के बाद एनडीटीवी की टीम इसमें जिंदा बची लड़की के घर पहुंची तो उस वक्त घर पर दादा-दादी मौजूद थे. उन्होंने बताया कि लड़की को एक रिश्तेदार के घर भेज दिया है. ग्रामीणों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन ग्रामीणों ने कुछ भी बताने से साफ-साफ इनकार कर दिया. करीब 5 किलोमीटर बिशनपुर गांव में लड़की अपने रिश्तेदार के घर मिली. बातचीत के दौरान उसने उस दिन की पूरी कहानी बताई.
लड़की ने बताया- उस दिन क्या हुआ था?
लड़की ने बताया कि पांचों सहेलियों ने उस दिन एक साथ जहरीली दवा खा ली थी और उसके बाद पानी पी लिया. मैंने भी जहरीली दवा ली थी लेकिन थूक दी. इसकी वजह से हमारी जान बच गई. कुछ ही देर में चारों सहेलियां मेरी आंखों के सामने बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी. हम डर के कारण वहां से भागकर सीधे घर पहुंचे और घर वालों को सब बताया. उसने कहा, 'घर पहुंचते ही घर वालों ने मुझे नीम के पत्तों का घोल पिलाया, जिससे मुझे उल्टियां हुईं और मेरी तबीयत में सुधार हुआ.'
जहर खाने की वजह क्या रही?
एक मृत लड़की के पिता ने बताया कि वह महाराष्ट्र में मजदूरी करते हैं. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव पहुंचे लेकिन अब तक उन्हें इसके पीछे की वजह समझ नहीं आई. प्रेम प्रसंग से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, 'सभी लड़कियां 12 से 15 साल की उम्र की थीं. इतनी छोटी बच्चियां किसी से प्यार कैसे कर सकती हैं?'
हालांकि, पुलिस की अब तक की जांच कुछ और ही बयां करती हैं. दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार ने बताया कि जिंदा बची लड़की से बातचीत और जांच के आधार पर ये सामने आया है कि सरस्वती पूजा की शाम सभी सहेलियां कुछ लड़कों के साथ घूम रही थीं. मां-बाप ने देख लिया तो उन्होंने बच्चियों को फटकार लगाई. इसी बात से नाराज होकर पांचों सहेलियों ने एक साथ जान देने का फैसला किया और गांव से कुछ दूरी तालाब के पास जाकर जहरीली दवा खा ली.
एक ही चिता पर अंतिम संस्कार
29 जनवरी को हुई इस घटना के बाद चारों सहेलियां का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के चलते परिजनों ने चारों लड़कियां का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर कर दिया था.














