- पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को मिली जमानत
- जेल से चुनाव लड़कर मोकामा से बने थे विधायक
- अनंत सिंह अब आगे नहीं लड़ेंगे चुनाव
पटना: बिहार में मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह लंबे समय बाद सोमवार (23 मार्च 2026) को जेल से रिहा हो गए . अनंत सिंह के जेल से रिहा होते ही उनके समर्थकों ने उनका ग्रैंड वेलकम किया. राजधानी पटना के बेऊर जेल के बाहर पहले से ही सैकड़ों की संख्या में मौजूद समर्थकों ने जोरदार जश्न मनाना शुरू कर दिया. अनंत सिंह जैसे ही जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले, समर्थकों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया. ढोल-नगाड़ों और नारेबाजी के बीच पूरे इलाके का माहौल उत्सव में बदल गया. “अनंत सिंह जिंदाबाद” और “हमारा नेता कैसा हो” जैसे नारों से बेऊर जेल का आसपास का इलाका गूंज उठा. कई समर्थक अपने नेता की एक झलक पाने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे थे.
दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में थे अनंत सिंह
रिहाई के मौके पर कुछ समर्थक मिठाइयां बांटते नजर आए, तो कुछ ने पटाखे फोड़कर अपनी खुशी जाहिर की. समर्थकों का कहना था कि उन्हें अपने नेता की रिहाई का लंबे समय से इंतजार था और आज वह दिन आ ही गया. बाहुबली नेता अनंत सिंह बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में बंद थे. चुनाव प्रचार के दौरान अक्टूबर 2025 में जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी. इस हत्या में अनंत सिंह को आरोपी बनाया गया है.
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या मामले में अनंत सिंह गिरफ्तार हुए और जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और विजयी हुए. निचली अदालतों से अनंत सिंह की जमानत अर्जी खारिज हो गई थी. इसके बाद अनंत सिंह ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। गुरुवार को हाईकोर्ट ने अनंत सिंह की जमानत मंजूर कर ली. 16 मार्च 2026 को बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग हुई थी, जिसमें अनंत सिंह ने जेल से आकर जदयू उम्मीदवार नीतीश कुमार को वोट दिया था. मतदान के बाद अनंत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि अब वे आगे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. राजनीति में अगली जिम्मेदारी उनके बड़े बेटे निभाएंगे.
शपथ के दौरान नीतिश का पैर छूकर लिया आशीर्वाद
मीडिया से उन्होंने कहा था कि जल्द ही जेल से बाहर आएंगे. राज्यसभा चुनाव से पहले भी अनंत सिंह जेल से बाहर आए थे. बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैर छू-कर आशीर्वाद लिया था. अनंत सिंह को पटना सिविल कोर्ट ने विधानसभा में शपथ लेने की अनुमति दी थी. अनंत सिंह की रिहाई को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क था. बिहार पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से बेऊर जेल के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी.
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि रिहाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता थी. किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई थी. हालांकि, जश्न के माहौल के बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही. अनंत सिंह की रिहाई के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में अनंत सिंह की सक्रियता क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है. खासकर स्थानीय स्तर पर उनके समर्थकों की संख्या और पकड़ को देखते हुए यह रिहाई कई समीकरण बदल सकती है.
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