बिहार में डॉक्टरों के 56% पद खाली, स्वास्थ्य सेवाओं में सीमांचल सबसे पीछे, ये आंकड़े क्यों चौंकाते हैं? जानिए

ग्रेड ए नर्स के 26 हजार 107 पद स्वीकृत हैं. 2024-25 में 10 हजार 926 ग्रेड ए नर्स कार्यरत हैं. जबकि 2023-24 में यह संख्या 11 हजार 462 थी. यानी एक साल में नर्सों की संख्या 536 घट गई.

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पटना:

बिहार चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है. सोमवार को जारी बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के आंकड़ों से यह साफ हुआ है. प्रदेश में 1 लाख की आबादी पर सिर्फ 7 सरकारी डॉक्टर हैं. प्रदेश में चिकित्सकों के 21 हजार 821 पद स्वीकृत हैं. इनमें सिर्फ 9658 चिकित्सक ही कार्यरत हैं. यानी डॉक्टरों के करीब 56 फीसदी पद खाली हैं. अरवल में प्रति 1 लाख की आबादी पर 16 से अधिक डॉक्टर हैं तो किशनगंज में 1 लाख की आबादी पर महज 3.9 डॉक्टर ही हैं. आंकड़े बताते हैं कि बिहार में मगध के इलाके में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और सीमांचल में बदतर. 

प्रति लाख की आबादी पर सबसे अधिक डॉक्टर वाले जिले 

  • अरवल - 16.4
  • शेखपुरा - 14.8
  • जहानाबाद - 14.6
  • शिवहर - 13.8
  • पटना - 12.4

प्रति लाख की आबादी पर सबसे कम डॉक्टर वाले जिले

  • किशनगंज - 3.9
  • अररिया - 4
  • कटिहार - 4.6
  • पश्चिमी चंपारण - 5.1
  • जमुई - 5.5

ग्रेड ए नर्स की संख्या घटी, 58 फीसदी पद खाली 

ग्रेड ए नर्स के 26 हजार 107 पद स्वीकृत हैं. 2024-25 में 10 हजार 926 ग्रेड ए नर्स कार्यरत हैं. जबकि 2023-24 में यह संख्या 11 हजार 462 थी. यानी एक साल में नर्सों की संख्या 536 घट गई. जबकि राज्य में पहले से नर्सों की संख्या कम है. राज्य में एक लाख की आबादी पर सिर्फ 8.4 ग्रेड ए नर्स कार्यरत हैं. पटना में यह संख्या सबसे अधिक है और किशनगंज में सबसे कम. 

प्रति लाख की आबादी पर सबसे अधिक ग्रेड ए नर्स वाले जिले

  • पटना - 29.7
  • दरभंगा -17.7
  • भागलपुर -16.2
  • मुजफ्फरपुर -12.2
  • गया और मुंगेर - 10.9

प्रति लाख की आबादी पर सबसे कम ग्रेड ए नर्स वाले जिले

  • किशनगंज -2.0
  • अररिया -3.3
  • कटिहार -3.3
  • सिवान - 4.3
  • सुपौल - 4.5

सरकार का दावा, बदले हैं हालात

सरकार दावा करती है कि पिछले 20 साल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है. सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण में भी इसका जिक्र किया गया. बताया गया कि 2005 से पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह औसतन 39 मरीज ही आते थे जबकि अब हर महीने औसतन 11 हजार 600 मरीज आते हैं. यह स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति की निशानी है. सरकार के इन दावों पर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सवाल खड़े करती है.

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