आम वाहन चालकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही घूम रहा है कि क्या इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो रहा है? क्या ये उनके महंगे वाहन के इंजन को अंदर से नुकसान पहुंचा रहा है? इन सभी सवालों के जवाब देने के लिए सरकार की तरफ से एक स्पेशल प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसमें देश के टॉप इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने खुलकर बात की. इंजिनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व सीएमडी वर्तिका शुक्ला ने इस बात पर जोर दिया कि देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला रातों-रात या बिना सोचे-समझे नहीं लिया गया है. यह पूरी तरह से एक मापा हुआ कदम है, जिसे बड़े रिसर्च और एक्सपेरिमेंट के बाद ही देशभर में लागू किया है.
📡𝐋𝐈𝐕𝐄 𝐍𝐎𝐖📡
— PIB India (@PIB_India) July 4, 2026
Press Conference by Industry Experts on #Ethanolhttps://t.co/g1DJBJQkCm
तो आखिरकार माइलेज पर कितना असर पड़ता है?
मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव आफिसर राहुल भारती ने एनडीटीवी के सवाल का जवाब देते कहा कि, E20 ईंधन से कार के माइलेज पर अंतर पड़ता है लेकिन ये बहुत कम होता है. कार में जब E10 से E20 ईंधन भरा जाता है तो माइलेज कम होता है लेकिन केवल 3.3 फ़ीसदी ही माइलेज कम होता है.
इंजन पर कोई असर नहीं
इसके साथ ही, एक्सपर्ट ने इंजन की सेफ्टी को लेकर भी तस्वीर साफ की. अभी के समय में मिल रहा E20 फ्यूल ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स पर तैयार किया है. ये मोर्डन BS-6 इंजन के साथ-साथ पुराने इंजनों के लिए भी पूरी तरह से अनुकूल है. इससे इंजन की लाइफ या परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता क्योंकि इसमें अभी भी 80 फीसदी फॉसिल फ्यूल ही रहता है.
'करोड़ों कारों की टेस्टिंग हुई'
मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कहा, "बाजार में चल रही आशंकाओं को देखते हुए हमने इसका कड़ी टेस्टिंग की है और हमें कोई समस्या नहीं मिली. साल 2023 में E20 ईंधन जरूरी किया गया था, उसके दो साल बाद, 2026 में हमने टोटल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की. इनमें से 1.5 करोड़ से ज्यादा कारें 3 साल से ज्यादा पुरानी थीं. इन सभी कारों में E20 फ्यूल का कोई भी नेगेटिव असर नहीं मिला.
सरकार की टेस्टिंग और भविष्य का रोडमैप
इस मुहिम में कदम से कदम मिलाते हुए टोयोटा के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने भी सरकार और इंडस्ट्री की तैयारियों को सामने रखा. गुलाटी ने बताया कि सरकार ने 2021 में एक विशेष कमेटी के फैसले के बाद बहुत कड़ी टेस्टिंग के बाद ही E20 की ओर बढ़ने का फैसला लिया था. उन्होंने कहा कि सरकार और ऑटो कंपनियां यहीं नहीं रुकने वाली हैं. आने वाले समय का रोडमैप इसी तरह की टेस्टिंग और एक्टिविटीज से तय होगा. इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 को भी लॉन्च कर दिया है.