Food Eating Rules: हम सभी के लिए भोजन सबसे जरूरी है, जिससे हमें रोजमर्रा के कार्य करने की शक्ति मिलती है. बता दें, भोजन को हिंदू धर्म में अन्नपूर्णा माता का प्रसाद माना जाता है, ऐसे में आपने अक्सर बड़े- बुजुर्गों से कहते हुए सुना होगा कि कभी भी भोजन का अपमान नहीं करना चाहिए और भोजन करने से पहले हाथ जोड़कर अन्नपूर्णा माता से प्रार्थना करनी चाहिए. वहीं, शास्त्रों में भोजन करने के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से मां अन्नपूर्णा खुश होती है और आपके जीवन में खुशहाली आती है. आइए ऐसे में जानते हैं, उन सभी नियमों के बारे में.
यह भी पढ़ें: प्रेमानंद महाराज ने बताया पूजा घर की ये गलतियां बन सकती हैं गरीबी का कारण, आप भी आज ही कर लें सुधार1. भोजन करने से पहले जरूर धोएं हाथ-पैरभोजन को कभी भी गंदे हाथ- पैर के साथ नहीं खाना चाहिए. इससे आपके भोजन में गंदगी आ सकती है. ऐसे में शास्त्रों में कहा गया है कि जब भी आप भोजन करने बैठें, तो अपने हाथ- पैर अच्छे से धोएं. ऐसा करने से सारी गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिलता है.
2. जमीन पर बैठकर करें भोजनशास्त्रों और परंपराओं में बेहतर पाचन के लिए जमीन पर बैठकर (अक्सर पालथी मारकर) भोजन करने का सुझाव दिया गया है. बता दें, इससे रक्त संचार में सुधार होता है. साथ ही व्यक्ति पृथ्वी यानी धरती मां से जुड़ाव महसूस करता है. शास्त्रों में भोजन को केवल शारीरिक ऊर्जा का स्रोत नहीं बल्कि पवित्र पोषण माना जाता है. ऐसे में अगर आप भी मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो नीचे बैठकर भोजन करें.
3. भोजन से पहले बोलें ये मंत्रशास्त्रों में, खासकर भगवद् गीता और उपनिषदों जैसे हिंदू ग्रंथों में, भोजन से पहले ब्रह्मर्पणम या नाम स्मरण (ईश्वर का नाम) जैसे मंत्रों का जाप करने के लिए कहा गया है. माना जाता है, कि ऐसा करने से भोजन पवित्र हो जाता है. ऐसे में भोजन करने से पहले सरल संस्कृत मंत्र "अन्नदाता सुखी भव" (भोजन देने वाले को प्रसन्नता/आशीर्वाद मिले) का जाप कर सकते हैं या फिर "ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै" तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥" मंत्र बोल सकते हैं.
4. थाली में जूठन न छोड़ेंशास्त्रों में भोजन की बर्बादी न करने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में अगर आप मां अन्नपूर्णा को निराश नहीं करना चाहते हैं, तो अपनी थाली में कभी भी जूठन न छोड़ें. बता दें, अगर आप जूठन छोड़ते हैं, तो आपको जीवन में नकारात्मक ऊर्जा आ सकती है और घर में अशांति फैल सकती है इसलिए थाली में परोसा गया पूरा भोजन समाप्त करें.
5. थाली के चारों ओर छिड़कें जलभारत में भोजन करने से पहले थाली के चारों ओर पानी छिड़कने की प्रथा काफी पुरानी है. इसका वर्णन शास्त्रों में भी है. कहा जाता है कि ऐसा करने से भोजन शुद्ध होता है और उसे खाने से भरपूर ऊर्जा मिलती है. इसी के साथ पानी का छिड़काव करने से थाली की चारों को जमी हुई धूल बैठ जाती है जिसके कारण भोजन दूषित होने से बच जाता है.
6. इस दिशा की ओर मुंह कर करें भोजनशास्त्रों के अनुसार भोजन करने की सही दिशा पूर्व या पश्चिम दिशा है. माना गया है कि इन दिशाओं की ओर मुंह करते हुए भोजन करने से पाचन क्रिया एक्टिव रहती है, भोजन का संपूर्ण पोषण मिलती है और सूर्य और कुबेर का आशीर्वाद मिलता है. इसी के साथ भोजन को शांति के साथ करना चाहिए, उस दौरान ज्यादा बातचीत न करने की सलाह दी जाती है.
7. भोजन के बाद करें वज्रासन और बोलें मंत्रभोजन के बाद वज्रासन योगासन यानी थंडरबोल्ट पोज जरूर करना चाहिए. बता दें, इसे करने से पाचन क्रिया में काफी मदद मिलती है. वहीं मंत्रों का जाप मन को शांत करने और आध्यात्मिक स्तर पर भोजन की ऊर्जा को शुद्ध करने में मदद करता है. अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं, तो आप पर मां अन्नापूर्णा की काफी कृपा होगी.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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