गुरू का कुंडली के तीसरे भाव में कैसा होता है प्रभाव, जानिए इस भाव से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में

गुरू बुद्धि और ज्ञान के कारक भी माने जाते हैं, ऐसे में कुंडली में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति की शुरुआती शिक्षा भी बेहतर होती है.

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तीसरे भाव को पराक्रम का भाव माना जाता है.

Astrology: कुंडली के तीसरे भाव में गुरू का होना अच्छा माना जाता है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति को आर्थिक परेशानी नहीं होती. आय में निरंतरता बनी रहती है. खासकर सरकार की ओर से भी आय होती है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से कामकाज में भी किसी तरह की परेशानी नहीं होती. मानसिक स्थिति मजबूत होती है. गुरू बुद्धि और ज्ञान के कारक भी माने जाते हैं, ऐसे में कुंडली में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति की शुरुआती शिक्षा भी बेहतर होती है. तीसरे भाव को पराक्रम का भाव माना जाता है. इसके साथ ही यह भाव आपके कम्यूनिकेशन और छोटे भाई और बहन के साथ रिश्तों का भी कारक होता है.

गुरू के सकारात्मक प्रभाव

तीसरे भाव में गुरू के सकारात्मक प्रभाव की बात करें तो इस भाव में वे बेहतर परिणाम देते हैं. किसी भी काम को करने में परेशानी नहीं होती. इतना ही नहीं भाई-बहन के साथ भी संबंध अच्छे रहते हैं और आपसी मेल-मिलाप बेहतर होता है. विदेश यात्रा के भी योग बनते हैं. इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति में धर्म के प्रति भी आस्था देखने को मिलती है. उसे संतान सुख भी मिलता है. 

गुरू के नकारात्मक प्रभाव

तीसरे भाव में गुरू के नकारात्मक प्रभाव की बात करें तो कुछ विपरीत परिणाम भी देखने को मिलते हैं. इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति को संतान प्राप्ति में बाधा का सामना करना पड़ सकता है. इतना ही नहीं स्वास्थ्य पर भी प्रभाव देखने को मिलता है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से पेट संबंधी समस्या भी उत्पन्न होती हैं. इनमें भूख की कमी देखने को मिलती है. इस कारण शारीरिक रूप से ये थोड़े कमजोर हो सकते हैं.

वैवाहिक जीवन पर प्रभाव

कुंडली के तीसरे भाव में गुरू को शुभ माना जाता है. ऐसे में इसका वैवाहिक जीवन पर भी शुभ प्रभाव देखने को मिलता है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से वैवाहिक जीवन खुशहाल और सुखमय रहता है. अहम बात यह है कि ऐसे लोग अपने जीवनसाथी की सभी बातों पर अमल करते हैं और उनके कहे अनुसार ही काम करते हैं. 

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गुरू का करियर पर प्रभाव

इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है. उसे नियमित आय होती है. सरकार से भी लाभ होता है. हालांकि, व्यक्ति को अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत होती है. ऐसे में उसे अपने काम पर ध्यान केंद्रीत करने की सलाह दी जाती है. ऐसे लोग खर्च करने के मामले में खुले हाथ वाले नहीं होते, यानी खर्च करने में कंजूसी बरतते हैं. हालांकि, ये जो भी काम अपने हाथ में लेते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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