गुरू का कुंडली के आठवें भाव में कैसा होता है प्रभाव, जानिए कुछ खास बातें

इस भाव में गुरू के प्रभाव से कई बार व्यक्ति कठोर और अभिमानी बन सकता है. उसमें जिद्दीपन भी देखने को मिल सकता है.

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इस भाव के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं.
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Astrology: कुंडली के अन्य भाव की तरह आठवां भाव भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति दीर्घायु होता है. उसमें परिवार के प्रति भी काफी स्नेह देखने को मिलता है. इस भाव में गुरू के प्रभाव (Jupiter Effects) से व्यक्ति को शुभ कार्यों का प्रेरणा मिलती है. इस भाव को मृत्यु, उम्र, पैतृक संपत्ति, गूढ़ विद्या, शेयर मार्केट और गुप्त बातों का कारक माना जाता है. इस भाव के स्वामी ग्रह मंगल होते हैं. यह भाव मिले-जुले फल देने वाला माना जाता है. हालांकि, व्यक्ति काफी धार्मिक होता है जिससे उसका भाग्योदय भी हो सकता है.

गुरू के सकारात्मक प्रभाव

आठवें भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति को कई तरीकों से आर्थिक लाभ भी होता है. उसे वसीयत और बीमा से धन का लाभ हो सकता है. उसकी आर्थिक स्थिति काफी बेहतर होती है और वह काफी सुखी और संपन्न होता है. व्यक्ति का अपने परिजनों से काफी प्रेम होता है और वह उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है. ऐसा जातक अपनी परंपरा को काफी महत्व देता है. गुरू के प्रभाव से व्यक्ति की अच्छे लोगों के साथ भी संगति हो सकती है.

गुरू के नकारात्मक प्रभाव

गुरू का आठवां घर थोड़ा रहस्यमय भी माना जाता है. इस भाव में गुरू के शुभ फल में कमी भी देखने को मिल सकती है. इस भाव में अचानक लाभ और हानि भी देखने को मिलती है. नकारात्मक प्रभाव का असर व्यक्ति की सेहत पर भी देखने को मिल सकता है. पेट और लीवर से जुड़ी समस्या भी हो सकती है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से कई बार व्यक्ति कठोर और अभिमानी बन सकता है. उसमें जिद्दीपन भी देखने को मिल सकता है.

वैवाहिक जीवन पर प्रभाव

आठवें भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. व्यक्ति का अपने प्रिय के साथ ही लाइफ पार्टनर के साथ ही काफी लगाव देखने को मिलता है. इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति को जीवनसाथी से लाभ हो सकता है. इसके साथ ही विवाह में विलंब होता है. गुरू के प्रभाव से दांपत्य जीवन का सुख भी बाधित हो सकता है.

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करियर पर प्रभाव

आठवें भाव में करियर पर प्रभाव की बात करें तो व्यक्ति को संपत्ति, पुरानी कलाकृति आदि से लाभ हो सकता है. इसके साथ ही ज्योतिष, आध्यात्मिक कार्य, धर्म गुरू, उपदेशक आदि क्षेत्र से जुड़ा हो सकता है. इसके साथ ही व्यक्ति वकील, क्लर्क, मनोचिकित्सक, लेखन और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा हो सकता है. व्यक्ति की शोध कार्यों में भी रूचि हो सकती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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