विदेश से लौटे NRIs के लिए भारत में काम करना कितना मुश्किल है? महिला ने बताई असली सच्चाई

विदेश से भारत लौटकर काम करने वाले NRIs के लिए असली जिंदगी कैसी होती है? NRI काउंसलर नुपुर दवे ने बताया कि कैसे ट्रैफिक, लोकेशन और वर्क कल्चर में बदलाव लोगों के अनुभव को पूरी तरह बदल देता है. जानिए भारत में काम करने की सच्चाई.

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NRI बनकर लौटे भारत… लेकिन यहां की नौकरी ने खोल दी आंखें!

विदेश में रहने के बाद भारत लौटना कई लोगों के लिए एक सपना होता है, अपनों के करीब रहने का, अपनी जड़ों से जुड़ने का. लेकिन, क्या यह सपना उतना आसान होता है जितना लगता है? एक NRI काउंसलर ने भारत में काम करने की असलियत बताई है, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है.

भारत लौटकर काम करने वाले NRIs (नॉन-रेजिडेंट इंडियंस) के अनुभव अक्सर उम्मीद से काफी अलग होते हैं. NRI काउंसलर और लेखिका नुपुर दवे ने इंस्टाग्राम पर अपने अनुभव और अवलोकन साझा करते हुए इस सच्चाई को सामने रखा है. उन्होंने बताया, कि विदेश से लौटने वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़ा झटका लोकेशन होता है.

शहर से दूर ऑफिस, बढ़ती परेशानी

भारत के बड़े शहरों में ज्यादातर मल्टीनेशनल कंपनियां शहर के बाहरी इलाकों में स्थित हैं, जैसे Whitefield (बेंगलुरु), गुरुग्राम (दिल्ली के पास) और Hinjewadi (पुणे). ऐसे में लोगों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है, या तो शहर के बीच में रहें, जहां कैफे, संस्कृति और सोशल लाइफ हो, लेकिन रोजाना 60-90 मिनट का लंबा ट्रैफिक झेलें. या फिर ऑफिस के पास रहें, जहां किराया कम हो और सफर आसान, लेकिन वहां जिंदगी काफी शांत और सीमित हो जाती है. नुपुर दवे के अनुसार, ज्यादातर लोगों का फैसला उनकी पसंद से नहीं, बल्कि बजट और अच्छे घर की उपलब्धता से तय होता है.

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काम का अलग अंदाज

भारत में काम करने का तरीका भी विदेश से अलग होता है. यहां लंच जल्दी-जल्दी डेस्क पर नहीं खाया जाता, बल्कि सहकर्मियों के साथ बैठकर, बातें करते हुए और आराम से खाया जाता है. आमतौर पर लंच दोपहर 2 बजे के आसपास होता है और यह एक सोशल एक्टिविटी बन जाता है. कई NRIs के लिए यह बदलाव चौंकाने वाला लेकिन अच्छा अनुभव होता है.

हर चीज परफेक्ट नहीं होती

नुपुर दवे यह भी साफ करती हैं कि भारत लौटने का अनुभव हमेशा परफेक्ट नहीं होता. यहां ट्रैफिक, गर्मी, शोर और रोजमर्रा की परेशानियां भी हैं, जिनके साथ तालमेल बैठाना पड़ता है. लेकिन, इसी बीच ऑफिस की दोस्ती, लोगों का साथ और छोटी-छोटी बातें धीरे-धीरे खास बन जाती हैं.

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आखिर फैसला आपका है

उन्होंने कहा, कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप जिंदगी में क्या चाहते हैं. अगर आपको सिस्टम, सुविधा और समय की पाबंदी ज्यादा पसंद है, तो भारत की अव्यवस्था आपको मुश्किल लग सकती है. लेकिन, अगर आप लोगों के साथ जुड़ाव और रिश्तों को महत्व देते हैं, तो भारत की जिंदगी आपको अपनापन दे सकती है.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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